बीएएमएस की फर्जी डिग्री बेचने वाला फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार
6-10 लाख में देता था, अलग-अलग राज्यों के विश्वविद्यालयों की 68 डिग्री बरामद, नकली डिग्रियों का जखीरा देख हैरान गए जवान
ओजस्वी किरण डेक्स
प्रयागराज। यूपी एसटीएफ की प्रयागराज इकाई ने प्रयागराज में एक खुद को डॉक्टर बताने वाले एक ऐसे इंटरस्टेट रैकेट के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है, जो बीएएमएस की फर्जी डिग्रियां बांटता था। करीब पांच साल से चल रहे इस रैकेट के जरिए फर्जी मार्कशीट, डिग्री और प्रमाणपत्र बनाकर उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में लाखों रुपए की ठगी की गई। इसका सरगना मो. तारूक न सिर्फ फर्जी डिग्रियां बेच रहा था, बल्कि उन्हीं के सहारे मरीजों का इलाज भी कर रहा था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस पूरे रैकेट का खुलासा तब हुआ जब मिर्जापुर के ब्रह्मानन्द ने पुलिस उपाधीक्षक, एसटीएफ फील्ड यूनिट प्रयागराज को एक लिखित शिकायत दी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि प्रयागराज के जीटीबी नगर, करेली निवासी तारूक ने उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के मेडिकल कॉलेजों के नाम पर बीएएमएस की फर्जी डिग्री और प्रमाणपत्र दिलाने के बदले दर्जनों लोगों से ठगी की। उससे भी करीब 6 लाख रुपए वसूले। शिकायत में बैंक खाते में अलग-अलग तिथियों में जमा की गई रकम, किस्तों में भुगतान और फर्जी डिग्री सौंपने से जुड़े सबूत भी दिए गए।
शिकायत मिलने के बाद मामले की गोपनीय जांच कराई गई। जांच की जिम्मेदारी प्रभारी इंस्पेक्टर जेपी राय के नेतृत्व में एसटीएफ फील्ड यूनिट प्रयागराज ने शुरू की। टीम ने शिकायतकर्ता के बैंक ट्रांजैक्शन की जांच की तो आरोपी के खातों में रकम जमा होने की पुष्टि हुई। जांच के दौरान पता चला कि उसने पीड़ित को जो डिग्री दी, वह फर्जी थी। जिन संस्थानों के नाम पर बीएएमएस की डिग्रियां दी जा रही थीं, उनमें से कई तो अस्तित्व में ही नहीं थे।
एसटीएफ ने आरोपी के सीडीआर, डिजिटल डेटा और दस्तावेजों की जांच की। इसके अलावा मैनुअल इंटेलिजेंस भी कलेक्ट किया। इसके जरिए पता चला कि यह पूरा रैकेट करेली क्षेत्र में स्थित एक क्लिनिक से संचालित हो रहा है। यहीं डील होती थी और इसके बाद जाली दस्तावेज तैयार किए जाते थे।
एसटीएफ अफसरों ने बताया- पुख्ता साक्ष्य मिलने के बाद शुक्रवार देर रात प्रभारी के नेतृत्व में एसटीएफ के एसआई गुलजार सिंह, प्रभंजन पांडेय व अन्य ने करेली में सावित्रीबाई फुले मेडिकल रिसर्च सेंटर, जिसे आरोपी ही संचालित कर रहा था, में दबिश दी गई।
कार्रवाई करने वाली टीम में शामिल जवान, अफसर तब हैरान रह गए, जब वहां एक-दो नहीं बल्कि 68 फर्जी डिग्रियां मिलीं। इसके बाद आरोपी से पूछताछ शुरू हुई और इस दौरान उसने कबूल किया कि उसने शिकायतकर्ता से बैंक खाते में पैसे लिए और उसे फर्जी बीएएमएस डिग्री दी। इसके बाद उसे मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। छापेमारी के दौरान एसटीएफ ने आरोपी के पास से 1 सीपीयू-मॉनिटर, 1 मोबाइल फोन, 1 पेन ड्राइव (32 जीबी), 68 फर्जी मार्कशीट/डिग्री/प्रमाणपत्र की प्रतियां बरामद कीं। बरामद सामग्री से यह साफ हो गया कि मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि इंटरस्टेट फर्जी मेडिकल डिग्री रैकेट से जुड़ा है।
गिरफ्तार आरोपी ने पूछताछ में बताया- वह 6 से 10 लाख रुपए लेकर बीएएमएस की फर्जी डिग्री देता था। अलग-अलग राज्यों के विश्वविद्यालयों के नाम पर फर्जी डिग्रियां तैयार करता था।
यह भी कबूला कि शिकायतकर्ता ब्रह्मानन्द को शिवालिक आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज आजमगढ़ और वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के नाम पर फर्जी डिग्री दी गई थी। इसी तरह कई अन्य लोगों को भी ओडिशा, उत्तराखंड और अन्य राज्यों के संस्थानों के नाम पर बीएएमएस की फर्जी डिग्रियां उपलब्ध कराईं।

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