उत्तर प्रदेश में यूरिया के साथ गैर-अनुदानित उर्वरकों की टैगिंग पर पूर्ण प्रतिबंध
किसानों को जबरन अन्य उत्पाद बेचने वाली कंपनियों पर होगी कठोरतम कार्रवाई
01 जनवरी 2026 से प्रदेश में गैर-अनुदानित उत्पादों की आपूर्ति और बिक्री पूरी तरह वर्जित
ओजस्वी किरण ब्यूरों
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा करते हुए प्रदेश में यूरिया के साथ गैर-अनुदानित उर्वरकों की ‘टैगिंग’ को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। शासन द्वारा यह निर्णय उन शिकायतों के बाद लिया गया है जिनमें यूरिया आपूर्ति करने वाली कंपनियां अपने डिस्ट्रीब्यूटर्स और रिटेलर्स के माध्यम से किसानों को यूरिया के साथ अन्य महंगे और गैर-जरूरी उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य कर रही थीं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश का कोई भी किसान अब केवल अपनी आवश्यकतानुसार अनुदानित उर्वरक ही खरीदेगा और उस पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त उत्पाद थोपा नहीं जाएगा।
प्रदेश में यूरिया की आपूर्ति करने वाली कंपनियों द्वारा टैगिंग की कुप्रथा को रोकने के लिए शासन स्तर पर सात बार विभिन्न स्थानों पर कंपनियों के प्रतिनिधियों, होलसेलरों और रिटेलरों के साथ बैठकें की गई थीं। इन बैठकों में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि किसानों को यूरिया के साथ अन्य उत्पाद न दिए जाएं। इन निर्देशों के बावजूद लगातार जनपदों से शिकायतें प्राप्त हो रही थीं कि कृषकों को यूरिया के साथ अन्य गैर-अनुदानित उत्पाद लेने के लिए विवश किया जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने किसानों को गुणवत्तायुक्त और सुगम उर्वरक निर्धारित दर पर उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
शासन द्वारा सम्यक विचारोपरान्त यह कड़ा निर्णय लिया गया है कि उत्तर प्रदेश में यूरिया आपूर्ति करने वाली समस्त संस्थाओं को केवल अनुदानित उर्वरक की आपूर्ति एवं बिक्री की ही अनुमति होगी। कंपनियों के उर्वरक विक्रय प्राधिकार-पत्र (लाइसेंस) में अंकित समस्त गैर-अनुदानित उत्पादों की आपूर्ति एवं बिक्री को 01 जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश में पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया है। अब कोई भी कंपनी यूरिया की आड़ में अपने अन्य व्यवसायिक उत्पादों को प्रदेश की सीमा के भीतर नहीं बेच सकेगी।
01 जनवरी, 2026 के बाद यदि प्रदेश में कोई भी उर्वरक आपूर्ति करने वाली कम्पनी इस आदेश का उल्लंघन करती पाई जाती है या यूरिया के साथ टैगिंग करती है, तो उसके विरुद्ध उर्वरक (अकार्बनिक, कार्बनिक या मिश्रित) (नियंत्रण) आदेश, 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के सुसंगत प्राविधानान्तर्गत नियमानुसार कठोरतम विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। इस निर्णय से प्रदेश के लाखों किसानों को आर्थिक शोषण से मुक्ति मिलेगी और उन्हें सही मूल्य पर खाद उपलब्ध होगी।

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