वाम दलों ने भाकपा (माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव व नेताओं की रिहाई की मांग की
गिरफ्तारी को अलोकतांत्रिक व दमनकारी बताया,छह जनवरी को राज्यव्यापी प्रतिवाद होगा
ओजस्वी किरण ब्यूरों लखनऊ
लखनऊ। प्रदेश के प्रमुख वामपंथी दलों ने भाकपा (माले) के राज्य सचिव कॉमरेड सुधाकर यादव व अन्य नेताओं को मिर्जापुर में शनिवार (3 जनवरी को) गिरफ्तार कर लेने की कड़ी निंदा की है और उनकी अविलंब बिना शर्त रिहाई की मांग की है।
वामपंथी नेताओं ने आज सीपीआई (एम) के विधानसभा मार्ग स्थित प्रदेश कार्यालय में आयोजित संयुक्त प्रेसवार्ता में कहा कि माले राज्य सचिव सुधाकर यादव को मिर्जापुर जिले के लालगंज थाने में दर्ज जिस मामले (एफआईआर सं. 04/2026) में पुलिस गिरफ्तार बता रही है, उसमें उनका नाम भी नहीं है। न ही वे मौके पर मौजूद थे। उन्हें फर्जी तरीके से फंसाकर गिरफ्तार किया गया है।
इसी प्रकार, भाकपा (माले) की राज्य स्थायी समिति सदस्य व जिला सचिव कॉमरेड जीरा भारती को भी शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें भी पुलिस उक्त मामले में गिरफ्तार बता रही है, जबकि मौके पर वे भी नहीं थीं। कॉमरेड जीरा भारती को एफआईआर में झूठे तरीके से नामजद किया गया है।
ये दोनों गिरफ्तार नेता बनारस में एक दिवंगत पार्टी सदस्य की अंत्येष्टि में भाग लेकर लौट रहे थे। उन्हें दोपहर साढ़े तीन बजे के लगभग अदलहाट थानाक्षेत्र (मिर्जापुर) में शर्मा मोड़ मार्केट के पास गिरफ्तार किया गया।
शुरु में पुलिस ने बिना कोई कारण बताये एवं बगैर कोई वारंट दिखाये गिरफ्तार किया। पुलिस ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि उन्हें किस कारण या किस मामले में ले जाया जा रहा है। अभी तक यह भी नहीं पता चला है कि इन नेताओं को कहां ले जाया गया है। तमाम कोशिशों के बावजूद किसी भी अधिकारी ने गिरफ्तार नेताओं के बारे में आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।
कामरेड सुधाकर यादव व कामरेड जीरा भारती सहित वाम दल मिर्जापुर जिले में वनाधिकार कानून के तहत वहां के आदिवासियों के वनाधिकारों को बहाल करने, उनका विस्थापन रोकने व बुलडोजर कार्रवाई वापस कराने के संघर्ष का नेतृत्व कर रहे हैं।
दो दिन पहले ही, शुक्रवार को, आदिवासियों को वनाधिकार कानून के तहत दावा दाखिल करने वालों को जमीन पर मालिकाना देने, पुस्तों से बसे एवं खेती करते आ रहे आदिवासियों-वनवासियों को उनकी जमीन और मकान से बेदखली रोकने और वन विभाग एवं प्रशासन द्वारा कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न रोकने की मांग के साथ मिर्जापुर मंडलायुक्त के समक्ष जन प्रदर्शन हुआ था। उसमें वन विभाग की जमीनों पर भूमाफिया द्वारा संगठित रूप से प्रशासन की मिलीभगत से कब्जा करने का भी विरोध किया गया था।
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शुक्रवार के प्रदर्शन के दौरान विन्ध्याचल मंडल के अपर कमिश्नर के अश्वासन के बाद भी वन विभाग के कर्मी अगले दिन जबरदस्ती आदिवासी बस्ती (तेंदुआ खुर्द, लालगंज) में शनिवार रात में करीब 2 बजे लहलहाती फसलों को उजाड़ने के लिए आ गए। जब इसका विरोध गांव वालों ने किया तो उन पर हमला कर दिया गया और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया। इसमें कुछ व्यक्तियों के घायल होने की सूचना है।
जबकि अपर कमिश्नर विंध्याचल मंडल द्वारा बुलडोजर ना चलने का आश्वासन दिया गया था। बिना किसी नोटिस/सूचना दिए जबरदस्ती लहलहाती फसलों को उजाड़ा जा रहा है। इसी मामले में उक्त एफआईआर (सं. 04/2026) वन विभाग की ओर से पुलिस ने दर्ज कर ली, लेकिन घायल गांव वालों व महिलाओं की तहरीर पर एफआईआर नहीं लिखी है। कई गांव वालों को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
कामरेड सुधाकर यादव व कामरेड जीरा भारती दोनों नेताओं की गिरफ्तारी पहले (03.30 बजे तक) की गई और एफआईआर (सं. 04/2026) बाद में लालगंज थाने में 3 जनवरी ’26 को दिन में 03.46 बजे दर्ज की गई है। उसमें भी गिरफ्तार माले राज्य सचिव का नाम नहीं है।
वाम दलों के नेताओं ने माले राज्य सचिव सुधाकर यादव, जिला सचिव जीरा भारती और गिरफ्तार गांववासियों की तत्काल रिहाई, उन्हें फर्जी फंसाने वाले पुलिस प्रशासन के अधिकारियों व लालगंज में आदिवासियों पर हमला करने वाले वनकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और बुलडोजर एक्शन को तत्काल रोकने की मांग की।
वामपंथी नेताओं ने इन गिरफ्तारियों को योगी सरकार की अलोकतांत्रिक और दमनकारी कार्रवाई बताया और 06 जनवरी (मंगलवार) को राज्यव्यापी प्रतिवाद का आह्वान किया।
प्रेसवार्ता को सीपीआई (एम) की केंद्रीय समिति के सदस्य डा. हीरालाल यादव, सीपीआई के राज्य सचिव मंडल की सदस्य कांति मिश्रा, भाकपा (माले) के राज्य स्थायी समिति के सदस्य रमेश सिंह सेंगर व अरुण कुमार और फारवर्ड ब्लॉक के उदयनाथ सिंह ने संबोधित किया।

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