आशा कर्मियों की राज्यव्यापी हड़ताल 26 वे दिन मंडलायुक्त कार्यालयों पर प्रदर्शन
उप मुख्यमंत्री माफी मांगे, मांगें पूरी हुए बिना हड़ताल वापस नहीं :श्वेता राज
ओजस्वी किरण ब्यूरों
लखनऊ। आशा कर्मियों की राज्यव्यापी हड़ताल 26 वे दिन मंडलायुक्त कार्यालयों पर प्रदर्शन के राज्य व्यापी आह्वान पर आशा कर्मी हाड़ कंपा देने वाली सर्दी के बावजूद रायबरेली, उन्नाव, बाराबंकी , लखीमपुर , हरदोई से आकर भारी संख्या में परिवर्तन चौक पर जुटी ।
आल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ,दिल्ली आशा कर्मचारी संघ की अध्यक्ष श्वेता राज ने प्रदर्शनकारी आशा कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र व राज्य सरकार 45/46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू कर कर्मचारी का दर्जा देने ,न्यूनतम वेतन , ईपीएफ , ईएसआई और ग्रेच्युटी की सुविधा देने में कोई रुचि नहीं दिखाई । पिछले 12 वर्षों से सरकार की खुद की सिफारिशें धूल फांक रही हैं। 44 श्रम कानूनों को खत्म कर 4 श्रम संहिताओं को लागू करने की मोदी सरकार की कवायत भविष्य में इस संभावना पर ही पूर्ण विराम लगाने की तरफ बढ़ा हुआ कदम है। इसलिए आज उत्तर प्रदेश में जारी आंदोलन ऐतिहासिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। सरकार को पीछे धकेलना होगा।
मण्डल अध्यक्ष गीता मिश्रा ने कहा की रात दिन स्वास्थ्य अभियानों में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने वाली आशा, संगीनियों को मिलने वाली बेहद शर्मनाक प्रोत्साहन राशियों का भुगतान नहीं किया जा सका। कुल 1.5 लाख करोड़ रु से अधिक के बकाये की अदायगी के सम्बन्ध में सरकार चुप्पी साधे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि वर्षों पूर्व निर्धारित की गई प्रोत्साहन राशियों का दशकों बाद भी कोई पुनरीक्षण तक कर उसकी नई दरें निर्धारित भी निर्धारित नहीं की जा सकी ।
जबकि मंहगाई में अब तक 100% या इससे भी ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई है । यहां तक कि दर्जनों कामों की कोई प्रोत्साहन आज तक निर्धारित ही नहीं की गई । जिसे बेगार के रूप में करने के लिए बाध्य किया जाता है । एक तरह से काम के असीमित बोझ और भूख से जूझती प्रदेश की आशा व संगीनियों के सवालों को सुनने के बजाय उनसे बंधुआ मजदूर की तरह व्यवहार किया जा रहा है।अब यह नहीं चलेगा और बिना मांगे पूरी हुए आंदोलन वापस नहीं होगा।
लखीमपुर अध्यक्ष राकिया बानो ने कहा कि इतनी घोर अमानवीय स्थितियों में काम बोझ ढोती आशा कर्मियों की स्मिता और मर्यादा को भी अक्सर तार तार करने की घटनाएं होती रहती हैं,किंतु इसके विरुद्ध भी कोई कुछ सुनने वाला नहीं है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की टिप्पणी भी उसी की अभिव्यक्ति है । उन्हें अपने बयान पर शर्मिंदा होना चाहिए।प्रदेश की आशा कर्मियों से माफी मांगनी होगी।
उन्नाव जिलाध्यक्ष और मंडल सचिव ने कहा कि 2021 में मुख्यमंत्री की विधान सभा में की गई घोषणा और 2025 के बजट के दौरान वित्त मंत्री द्वारा सदन में दी गई जानकारी के अनुरूप आशा कर्मियों में एक को भी 6750 रु कभी नहीं भुगतान किए गए और न किसी संगिनी को 11000/ रु । यह बीच में कोई निगल जाता है या सरकार झूठ बोल रही है ,इस प्रश्न का उत्तर एक लाख से अधिक पत्रों, 1000 से अधिक ज्ञापनों के माध्यम से पूछने के बाद भी नहीं मिला।
बाराबंकी जिलाध्यक्ष विनोद कुमारी ने कहा कि श्रम और पारिश्रमिक की शर्मनाक लूट के बीच सरकार और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कुछ पिट्ठू सचेतन आशा कर्मियों को बदनाम करने का भी निरंतर अभियान चलाकर सामाजिक रूप से अलगाव में डालने की कोशिश और अपने काले चेहरे को उसी की ओट में छिपाने में लगी रहती है। सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरीजों ,तीमारदारों से उगाही के अड्डे बन गए हैं। गर्भवतियों से तागा , धागा, दवाएं बाहर से खरीदवाने के अलावा 3000 रु से 5000 तक देने के लिए बाध्य किया जाता है।
जन्म प्रमाण पत्र देने तक के वसूली होती है और बदनामी आशा कर्मियों की होती है। यह प्रदेश भर में तय फीस की तरह हैं। इसका विरुद्ध करने पर निकाल देने का धमकी वाला बज्र हमेशा तैयार रहता है।
हजारों पत्र ,शिकायतें, वीडियो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन , सरकार को भेजने के बाद भी सभी वर्षों से एक ही पटल पर जमे बैठे लूट का साम्राज्य चला रहे हैं। नारी सुरक्षा और सम्मान की बकवास करने वाले राज्य में आशा, संगिनी को एक दिन का मातृत्व अवकाश तक नहीं मिलता । स्वास्थ्य नारी , स्वस्थ्य परिवार का नारा घर घर तक ले जाने वाली आशा और संगिनी खुद ही कुपोषित हो गईं।
राज्य कमेटी सदस्य अर्चना रावत ने कहा कि 23 / 12/ 2025 के ऐतिहासिक विधान सभा मार्च से घबराई सरकार ने प्राथमिक स्तर पर वार्ता कर मांगो को पूरा करने के लिए एक सकारात्मक दिशा तय करते हुए तत्काल अगले चरण की वार्ता बुलाने का आश्वासन दिया था , किंतु सरकार ने आशा कर्मियों से वादा खिलाफी की है।
सरकार अगर दमन और प्रताड़ना के बल पर आंदोलन को कुचलने की हर कोशिश विफल होगी और समस्याओं का समाधान करना ही होगा। लखनऊ जियाध्यक्ष कमला गौतम , साहिरा बानो, ममता पाल आदि ने भी संबोधित किया।
बाद में मुख्यमंत्री को संबोधित 14 सूत्रीय स्थाईकरण , न्यूनतम वेतन की गारंटी , ईपीएफ, ईएसआई, ग्रेडयूटी, मातृत्व अवकाश दिए जाने , 1.5 लाख करोड़ की 5 वर्ष की बकाया प्रोत्साहन राशि का भुगतान करने आदि मांगो से संबंधित ज्ञापन सौंपा गया।

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