मकर संक्रांति व मौनी अमावस्या पर कड़ी सुरक्षा, मेला क्षेत्र नो-व्हीकल जोन घोषित
ओजस्वी किरण ब्यूरो
प्रयागराज। माघ मेला 2026 के दौरान मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या के अवसर पर उमड़ने वाली लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित स्नान की सुविधा देने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा और यातायात प्रबंधन योजना लागू की है। इसके तहत 13 जनवरी की रात 8 बजे से 19 जनवरी की रात 12 बजे तक संपूर्ण मेला क्षेत्र को नो-व्हीकल जोन घोषित किया गया है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस अवधि में केवल आवश्यक प्रशासनिक और चिकित्सकीय वाहनों को ही सीमित प्रवेश की अनुमति होगी। आम नागरिकों के सभी प्रकार के वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। साथ ही अक्षयवट दर्शन अस्थायी रूप से बंद रखे जाएंगे। भीड़ की स्थिति को देखते हुए यह प्रतिबंध आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
आगमन दिशा के अनुसार स्नान की व्यवस्था
श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह व्यवस्था की है कि जिस दिशा से श्रद्धालु मेला क्षेत्र में प्रवेश करेंगे, उसी के समीप स्थित घाट पर स्नान कराया जाएगा।
उदाहरण के तौर पर, काली मार्ग से आने वाले श्रद्धालुओं को अपर संगम, हनुमान घाट या रामघाट की ओर निर्देशित किया जाएगा। इससे संगम नोज पर अनावश्यक दबाव कम होगा और स्नान प्रक्रिया अधिक सुरक्षित व सुगम बनेगी।

मुख्य स्नान पर्वों पर विशेष सतर्कता
मकर संक्रांति: 14–15 जनवरी
मौनी अमावस्या: 19 जनवरी
इन दोनों प्रमुख पर्वों को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल, स्वयंसेवक और निगरानी दल तैनात किए जाएंगे। पैदल मार्गों को स्पष्ट संकेतकों से चिह्नित किया गया है, ताकि श्रद्धालु बिना भटकाव के अपने निर्धारित घाट तक पहुंच सकें।
यातायात डायवर्जन और पार्किंग व्यवस्था
भारी वाहनों के लिए शहर के बाहर से ही वैकल्पिक मार्ग तय किए गए हैं, जिनमें मंदर मोड़, फाफामऊ पार्क तिराहा सहित अन्य रास्ते शामिल हैं।

संगम नोज क्षेत्र में किसी भी प्रकार की पार्किंग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। बाहरी जिलों से आने वाली बसों को केवल निर्धारित पार्किंग स्थलों (जैसे प्लॉट नंबर 17) में ही खड़ा किया जाएगा। वहां से श्रद्धालुओं को पैदल मार्गों के जरिए मेला क्षेत्र में प्रवेश दिया जाएगा।
मेला प्रशासन की अपील
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित पार्किंग स्थलों, पैदल मार्गों और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें। सहयोग से ही माघ मेला के पावन स्नान पर्व शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सुव्यवस्थित रूप से संपन्न कराए जा सकते हैं।

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