सुहागिन होकर भी अभागीन बनी रही पद्मिनी

1 min read

सुहागिन होकर भी अभागीन बनी रही पद्मिनी

ओजस्वी किरण ब्यूरो 

प्रयागराज। एनसीजेडसीसी में आयोजित भरतमुनि नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को नाटक हयवदन का भावपूर्ण मंचन किया गया। प्रस्तुति हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़ वाल केंद्रीय विवि श्रीनगर की रही। गिरीश कर्नाड के लिखित मूल नाटक का निर्देशन महेन्द्र सिंह ने किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सेवा भारती के उपाध्यक्ष आरपी शुक्ला, उप-निदेशक डॉ. मुकेश उपाध्याय व कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय ने किया। इस मौके पर कलाकारों ने सशक्त संवाद व अभिनय से मंच पर कथानक की जीवंत प्रस्तुति की। नाटक के पहले दृश्य में देवदत्त, पद्मिनी और कपिल के त्रिकोणीय प्रेम को दिखाया गया। सुहागिन होकर भी अभागिन रह जाने वाली पद्मिनी के अभिनय को दर्शकों ने सराहा।

नाटक में दिखाया गया कि कपिल देवदत्त का विवाह प्रस्ताव पद्मिनी के घर लेकर जाता है। लेकिन देवदत्त के साथ अपनी मित्रता की मर्यादा उसे रोक देती है। वह उन दोनों का विवाह करवा देता है। कथानक की मुख्य कथा के साथ-साथ ही एक उप-कथा घोड़े के सिर वाले आदमी (हयवदन) का हास्य पुट दर्शकों को गुदगुदाता है। नाटक का संगीत, नाट्य तकनीक ने कलाकारों के अभिनय को ऊंचाई प्रदान की। संचालन आकांक्षा पाल ने किया।

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours