सीटीजी मशीन से सुरक्षित मातृत्व की ओर कदम,गर्भावस्था और प्रसव में मिलेगी सटीक निगरानी : डॉ. सोनिया नित्यानंद
20 मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों और स्टाफ नर्स को दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण
बेहतर सटीकता के लिए AI-सक्षम मशीनों का हो उपयोग
सीएचसी स्तर पर सीटीजी के उपयोग से मातृ व शिशु मृत्यु दर में आएगा बड़ा बदलाव: डॉ. पिंकी
ओजस्वी किरण ब्यूरो
लखनऊ। प्रदेश में 60 प्रतिशत से अधिक गर्भवती महिलाएं प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर सेवाएं लेती हैं। ऐसे में यदि सीएचसी स्तर पर कार्डियोटोकोग्राफी (सीटीजी) मशीन का नियमित उपयोग शुरू हो जाए, तो यह मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। साथ ही, सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की प्राप्ति में भी प्रदेश को महत्वपूर्ण सफलता मिलेगी।
यह बात राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने गुरुवार को रीजनल रिसोर्स ट्रेनिंग सेंटर (आरआरटीसी) के अंतर्गत आयोजित सीटीजी प्रशिक्षण कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर कही। इस कार्यशाला में गोरखपुर, आजमगढ़, जालौन, बदायूं और अलीगढ़ मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों एवं स्टाफ नर्स ने भाग लिया।
सीटीजी एक सुरक्षित और प्रभावी तकनीक है, जिसका उपयोग गर्भावस्था (विशेषकर तीसरी तिमाही) और प्रसव के दौरान अजन्मे शिशु (भ्रूण) की हृदय गति तथा गर्भाशय के संकुचन की निगरानी के लिए किया जाता है। यह जांच शिशु के स्वास्थ्य का आकलन करने और संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान करने में मददगार होती है।
क्वीन मैरी अस्पताल के सभागार में आयोजित इस प्रशिक्षण में डॉ. पिंकी जोवेल ने कहा कि आधुनिक तकनीकों का उपयोग निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन इसके साथ ही डॉक्टरों और नर्सों के लिए जच्चा-बच्चा की क्लीनिकल जांच भी उतनी ही आवश्यक है। कई बार जो बातें मशीन नहीं बता पातीं, वे एक चिकित्सक अपने अनुभव से समझ सकता है।
केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने आरआरटीसी कार्यक्रम को विश्वविद्यालय के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इससे मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं में निश्चित रूप से सुधार आएगा। साथ ही, उन्होंने क्लीनिकल और डायग्नोस्टिक सटीकता बढ़ाने के लिए एआई-सक्षम तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया।
प्रदेश के 20 मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों और स्टाफ नर्स को यह प्रशिक्षण दिया जाना है। गुरुवार को दूसरे बैच ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। इससे पहले राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (आरएमएल), कानपुर, बांदा, बरेली, सहारनपुर और नोएडा मेडिकल कॉलेज के प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। तीसरे और अंतिम बैच का प्रशिक्षण 21 अप्रैल को आयोजित होगा।
कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण ‘हैंड्स-ऑन स्किल स्टेशन’ रहा, जहां प्रतिभागियों ने वास्तविक केस परिदृश्यों के माध्यम से सीटीजी की व्याख्या का व्यावहारिक अभ्यास किया। इसके बाद मेडिकल कॉलेजों में सीटीजी परामर्श तंत्र को मजबूत करने के लिए विचार-विमर्श सत्र भी आयोजित किए गए।
कार्यशाला को महानिदेशक, परिवार कल्याण डॉ. एच.डी. अग्रवाल, महानिदेशक (प्रशिक्षण) डॉ. रंजना खरे, क्वीन मैरी की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू अग्रवाल, एनएचएम के महाप्रबंधक डॉ. मिलिंद वर्धन, डॉ. रवि दीक्षित एवं डॉ. ऊषा गंगवार ने संबोधित किया। आरआरटीसी कार्यक्रम का अवलोकन यूपीटीएसयू के वरिष्ठ परियोजना निदेशक जॉन एंथनी ने प्रस्तुत किया, जिसमें रेफरल परिवहन और नैदानिक सेवाओं को सुदृढ़ करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला गया।
तकनीकी सत्रों का संचालन आरआरटीसी की नोडल अधिकारी डॉ. सीमा टंडन, केजीएमयू की डॉ. रेनू सिंह, डॉ. स्मृति अग्रवाल एवं डॉ. शुचि अग्रवाल द्वारा किया गया। कार्यशाला का समापन प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरण के साथ हुआ।

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