आगरा में करोड़ों के नकली दवाईया और सरकारी सप्लाई के अवैध भंडारण का भंडाफोड़, दो गोदाम सील, FIR दर्ज
ओजस्वी किरण ब्यूरो
आगरा/अलीगढ़/रुड़की। उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) विभाग ने आगरा जनपद में औषधियों के अवैध भंडारण और नकली दवाओं के एक बहुत बड़े संगठित नेटवर्क के खिलाफ ऐतिहासिक कार्रवाई की है। विभाग की विशेष टीम ने छापेमारी कर भारी मात्रा में फिजीशियन सैंपल्स और सरकारी (डिफेंस) सप्लाई की दवाएं बरामद की हैं। इसके साथ ही बाजार में धड़ल्ले से बेची जा रही नकली “Oxalgin DP Tablet” के नेटवर्क का भी पर्दाफाश किया है।
झूलेलाल मार्केट में FSDA की बड़ी छापेमारी प्रदेश में सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाली दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए FSDA मुख्यालय लखनऊ के निर्देश पर विभिन्न जनपदों के औषधि निरीक्षकों की एक स्पेशल टीम गठित की गई थी। खुफिया सूचना के आधार पर इस टीम ने 22 और 23 मई 2026 को आगरा के फाउन्टेन स्थित झूलेलाल मार्केट में ‘मेसर्स ज्योति ड्रग हाउस’ (दुकान संख्या 8/564, प्रथम तल) पर छापा मारा।
शुरुआत में यह दुकान बंद पाई गई। टीम द्वारा फर्म के स्वामी नारायण दास से फोन पर कई बार संपर्क कर जांच में सहयोग करने और मौके पर उपस्थित होने का अनुरोध किया गया। काफी समय बीतने के बाद भी जब वह उपस्थित नहीं हुए और अपना फोन बंद कर लिया, तो मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस बल और ए.सी.पी. कोतवाली (फाउन्टेन) के सहयोग से परिसर की तीसरी मंजिल पर स्थित एक बंद गोदाम को खोलकर सघन जांच की गई।
भारी मात्रा में फिजीशियन सैंपल और सरकारी दवाएं बरामद
जांच के दौरान टीम को दो अवैध गोदामों से भारी मात्रा में एलोपैथिक औषधियों का अवैध भंडारण मिला। बरामद दवाओं में से अधिकांश पर ‘Physician Sample, Not for Sale’ (फिजीशियन सैंपल) अंकित था। इसके अलावा वहां भारी मात्रा में डिफेंस और सरकारी सप्लाई की औषधियां भी छिपाकर रखी गई थीं। जांच में यह बात भी सामने आई कि गोदाम संचालक द्वारा अपने कर्मचारी किशोर मेहता के माध्यम से इन फिजीशियन सैंपल्स का व्यावसायिक (कॉमर्शियल) उपयोग किया जा रहा था, जो कि पूरी तरह गैरकानूनी है।
नामी कंपनियों की दवाएं शामिल, Oxalgin DP के नकली नेटवर्क का खुलासा
इस अवैध गोदाम से देश की नामी-गिरामी फार्मास्युटिकल कंपनियों की औषधियां बरामद की गई हैं, जिनमें मुख्य रूप से मैकलियोड्स, डॉ रेड्डी, एफ डी सी, ल्यूपिन, ग्लेनमार्क, एग्लोमेड, जायडस, थियोन, इंडसविफ्ट, अल्केम, रेप्टाकोस, मेयर ऑर्गेनिक्स, ओजोन फार्मास्युटिकल्स और ट्रोइका आदि शामिल हैं।बरामद दवाओं में जाइनपार, मरोमक, टिमीनिक सिरप, पेंटोप डीएसआर, मिनॉक्सिडिल, न्यूफर्स पिगमेंट, ल्यूनिफेक्स, मेगा हील, एलीग्रा, एस्कोरिल सिरप, बेटा डीन, कॉस्कोपिन, कैंडिड, माइकोडर्म डस्टिंग पाउडर और विटकोफ़ॉल आदि प्रमुख हैं।
इसके साथ ही, आगरा में “Oxalgin DP Tablet” नामक औषधि के नकली निर्माण, भंडारण एवं बिक्री से जुड़े एक बड़े संगठित नेटवर्क का भी भंडाफोड़ किया गया है।
आरोपियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज
FSDA की इस बड़ी कार्रवाई के बाद अवैध रूप से संचालित इन गोदामों के संचालकों और संलिप्त कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार दो नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई हैं। इसके साथ ही ‘Oxalgin DP’ के नकली दवा प्रकरण में भी शामिल नामजद अभियुक्तों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
गर्मी में सड़ रही थीं जीवन रक्षक दवाइयां
जब अधिकारियों ने पुलिस के साथ मिलकर अवैध गोदाम का ताला खोला, तो वहां सरकारी सप्लाई (ESI और डिफेंस) की दवाइयां और डॉक्टरों को मिलने वाले फ्री सैंपल भारी मात्रा में मिले।
सबसे बड़ी लापरवाही यह थी कि इंसुलिन और रेबीज के टीके (वैक्सीन) बिना फ्रिज के, भारी गर्मी में खुले में रखे थे। बिना सही तापमान के ये दवाइयां खराब हो चुकी थीं, जिन्हें मरीजों को देने से उनकी जान भी जा सकती थी।
37 बोरे दवाइयां सील
जांच टीम ने लैब टेस्ट के लिए दवाओं के 10 सैंपल लिए हैं। बाकी बची सारी दवाओं को 37 प्लास्टिक के बोरों में भरकर सील कर दिया गया। इन दवाओं की कीमत करीब एक करोड़ रुपये है। यह गोदाम सीधे ‘ज्योति ड्रग हाउस’ दुकान से जुड़ा था, इसलिए दुकान को भी कानूनन बंद कर दिया गया है।
दुकान मालिक और कर्मचारियों पर केस दर्ज
आगरा के कोतवाली थाने में आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
पहला केस: मुख्य आरोपी नारायण दास हँसराजनी (दुकान मालिक) और उसके कर्मचारी किशोर मेहता पर हुआ है।
दूसरा केस: मालिक नारायण दास और उसके दूसरे कर्मचारी पुनीत कटार पर दर्ज किया गया है।पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इन लोगों के पास सरकारी अस्पतालों की दवाइयां कहां से आ रही थीं। इस मामले की विस्तृत जांच जारी है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सरकारी सप्लाई की दवाइयां खुले बाजार में कैसे पहुँचीं। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे दवाइयां खरीदते समय पक्के बिल और पैकेजिंग की जांच अवश्य करें।
रुड़की की फैक्ट्री में बनती थीं नकली दवाइयां
जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क के तार उत्तराखंड के रुड़की से जुड़े हुए थे।
फर्जी मैन्युफैक्चरिंग : रुड़की स्थित ‘Leroi Pharmaceuticals Pvt. Ltd.’ के परिसर में बड़े पैमाने पर नकली “Oxalgin DP Tablet” का निर्माण और पैकेजिंग की जा रही थी।
सामग्री बरामद : यूपी औषधि निरीक्षकों की टीम ने वहां से भारी मात्रा में पैकेजिंग मैटेरियल, प्रिंटिंग सामग्री, 90 किलोग्राम एम्बर कलर पीवीसी फॉयल और 2.7 किलोग्राम खाली स्ट्रिप्स के रोल बरामद किए। कंपनी के संचालक इनके संबंध में कोई वैध दस्तावेज या बिल नहीं दिखा सके।
गैंग का नेटवर्क: डिजिटल साक्ष्यों (चैट, कॉल डिटेल) से पुष्टि हुई है कि इस नकली दवा के निर्माण और सप्लाई श्रृंखला में आगरा, अलीगढ़ और रुड़की के कई बड़े चेहरे शामिल थे।
अवैध गोदामों से बड़ी बरामदगी विभाग ने दो प्रमुख स्थानों पर छापेमारी कर दवाओं का जखीरा पकड़ा है।
ज्योति ड्रग हाउस (आगरा): इसके बिना लाइसेंस वाले अवैध गोदामों से करीब ₹2.5 करोड़ मूल्य की दवाएं जब्त की गईं। बेहद खराब और असुरक्षित परिस्थितियों में रखे होने के कारण ये दवाएं मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती थीं।
श्री मेडिकल एजेंसी: यहाँ के अवैध गोदाम से ₹50 लाख की संदिग्ध औषधियां जब्त की गईं। एजेंसी के स्वामी सुरेंद्र गुप्ता ने कबूला कि अलीगढ़ निवासी मयंक गुप्ता उन्हें बिना बिल के यह माल सप्लाई करता था।
झोलाछाप डॉक्टरों को सप्लाई और हवाला नेटवर्क का शक
शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि सरकारी अस्पतालों में मुफ्त बटने वाली और “नॉट फॉर सेल” (Not for Sale) लिखी दवाओं को ग्रामीण इलाकों के झोलाछाप डॉक्टरों को ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा था। इस अवैध खरीद-बिक्री के करोड़ों रुपयों के लेनदेन के लिए हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किए जाने का गहरा संदेह है।
18 अन्य दवा फर्मों पर भी गिरा गाज
इस महाअभियान के तहत विभाग ने आगरा के करीब 18 अन्य दवा स्टोरों पर भी शिकंजा कसा है।
जीत केमिस्ट : ₹16 लाख के संदिग्ध इंजेक्शनों की बिक्री रोकी गई।
साहनी मेडिकल एजेंसी : ₹5 लाख का स्टॉक फ्रीज कर नमूने लिए गए।
युग फार्मा: बिना उचित तापमान (कोल्ड चेन टूटने) के रखी गई ₹3.6 लाख की इंसुलिन जब्त की गई।
इन 6 आरोपियों पर दर्ज हुई फिर
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 3(5), 61, 319, 336, 276, 277, 278 और औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम 1940 के तहत मामला दर्ज किया है। नामजद किए गए 6 मुख्य आरोपी इस प्रकार हैं।
नारायण दास हँसराजनी (मुख्य संचालक)किशोर मेहता (मालिक) पुनीत कटारसुरेन्द्र गुप्ता (श्री मेडिकल एजेंसी)मयंक गुप्ता (सप्लायर, अलीगढ़)अन्नू अरोरा एवं संयम अरोरा (लिरोय फार्मास्युटिकल्स, रुड़की)विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस रैकेट में शामिल कुछ अन्य बड़े वितरकों और डॉक्टरों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिससे जल्द ही कुछ और गिरफ्तारियां संभव हैं।

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