प्रयागराज में डिप्टी सीएम के आदेशों की उड़ी धज्जियां : CHC जसरा में लाखों की दवाएं कबाड़ में फेंकी

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प्रयागराज : CHC जसरा में महा घोटाला, कबाड़ में फेंकी गईं सरकारी दवाएं और जांच किट, वायरल हुआ वीडियो शासन स्तर पर जांच की तैयारी

​डिप्टी सीएम के कड़े निर्देशों की उड़ा रहे धज्जियां; गरीबों के हक पर डाका डालकर प्राइवेट मेडिकल-लैब को फायदा पहुंचाने का बड़ा खेल उजागर

 ओजस्वी किरण संवाददाता

प्रयागराज/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री द्वारा प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने के सख्त निर्देशों को प्रयागराज में सरेआम ठेंगा दिखाया जा रहा है। जनपद के जसरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में एक ऐसा गंभीर प्रशासनिक भ्रष्टाचार और लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसका वीडियो खूब वायरल हो रहा है। जिसने लखनऊ में बैठे स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को भी चौकन्ना कर दिया है। यहां मरीजों के लिए आई सरकारी जीवनरक्षक दवाएं, सिरिंज और कीमती डायग्नोस्टिक (जांच) किट्स अस्पताल परिसर के बाहर कबाड़ और कचरे के ढेर में लावारिस फेंकी मिलीं।

​सरकारी धन का खुला दुरुपयोग, लखनऊ तक गूंजेगी गूंज

​रविवार को जसरा सीएचसी की बाउंड्री वॉल के पास भारी मात्रा में फेंकी गई इन दवाओं की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। सूत्रों की मानें तो यह मामला सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता (Financial Misappropriation) और राजकीय संपत्ति के नुकसान का है। शासन द्वारा बजट अलॉट कर जो दवाएं जरूरतमंदों के लिए भेजी गई थीं, उन्हें मरीजों तक पहुंचाने के बजाय जानबूझकर कबाड़ में तब्दील कर दिया गया।

 कमीशनखोरी और ‘प्राइवेट नेक्सस’ का सिंडिकेट

​स्थानीय स्तर से मिल रही शिकायतों के अनुसार, यह कोई सामान्य लापरवाही नहीं बल्कि एक संगठित सिंडिकेट का हिस्सा है। आरोप है कि अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों और चिकित्सकों की शह पर :

निजी मेडिकल स्टोर्स को लाभ: अस्पताल के अंदर दवाओं का कृत्रिम अभाव (Shortage) दिखाकर गरीब मरीजों को बाहर के प्राइवेट स्टोर से महंगी दवाइयां खरीदने पर मजबूर किया जाता है।

पैथोलॉजी सेंटरों से सांठगांठ: मुफ्त सरकारी जांच किट को कचरे में फेंककर, मरीजों को कमीशन के चक्कर में निजी पैथोलॉजी सेंटर्स भेजा जाता है।

​सीधे विजिलेंस या उच्चस्तरीय जांच की मांग, नप सकते हैं कई जिम्मेदार

​मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री पोर्टल (IGRS) समेत स्वास्थ्य महानिदेशक (DG Health) और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को सीधे शिकायत भेजने का मन बनाया है।

​अस्पताल के स्टोर कीपर, फार्मासिस्ट और वर्तमान CHC अधीक्षक (Superintendent) सीधे इस घोर लापरवाही के दायरे में आते हैं। विभागीय जानकारों का कहना है कि यदि इस मामले की मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) प्रयागराज या शासन स्तर से गठित विशेष टीम द्वारा निष्पक्ष ऑडिट जांच करा दी जाए, तो सीएचसी के भीतर चल रहे बड़े भ्रष्टाचार के खेल का पर्दाफाश हो जाएगा और दोषियों पर निलंबन (Suspension) व विभागीय कार्रवाई तय है।

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