लालापुर में बड़ा हादसा: मां मसूरियन धाम से लौट रहे श्रद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली नहर में पलटी, मची चीख-पुकार

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लालापुर में बड़ा हादसा : मां मसूरियन धाम से लौट रहे श्रद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली नहर में पलटी, मची चीख-पुकार

​हाईकोर्ट के आदेशों की उड़ीं धज्जियां,ओवरलोड सवारी ढोने से हुआ हादसा, पुलिस और ग्रामीणों ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन

 ओजस्वी किरण विशेष संवाददाता

​प्रयागराज (लालापुर)। संगम नगरी के यमुनानगर क्षेत्र में सोमवार रात एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा सामने आया है। बारा तहसील के लालापुर थाना अंतर्गत अमिलिया ग्राम पंचायत में स्थित प्रसिद्ध मां मसूरियन धाम से दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली अचानक अनियंत्रित होकर पास की नहर में जा समाई। हादसे के वक्त ट्रॉली में क्षमता से कहीं अधिक लोग सवार थे। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों और स्थानीय पुलिस की तत्परता से समय रहते लोगों को नहर से बाहर निकाला गया। इस हादसे में दो महिलाओं और एक पुरुष सहित कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल भेजा गया है।

​दर्शन कर लौट रहे थे श्रद्धालु, चालक ने नशे में खोया नियंत्रण

​प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अतरैला थाना क्षेत्र के बसरेही गांव के रहने वाले श्रद्धालु मां मसूरियन धाम में दर्शन-पूजन करने आए थे। सोमवार रात जब वे वापस लौट रहे थे, तभी अचानक चालक ने ट्रैक्टर पर से नियंत्रण खो दिया और पूरी ट्रॉली सीधे नहर में जा गिरी। हादसा होते ही स्थानीय ग्रामीण तुरंत मदद के लिए दौड़े और नहर में उतरकर पानी में डूबे बच्चों और महिलाओं को बाहर निकालना शुरू किया।

​सूचना मिलते ही लालापुर थाने के उप निरीक्षक अमित यादव पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और आपातकालीन सेवा (एम्बुलेंस) के जरिए घायलों को तुरंत अस्पताल भिजवाया।

​हाईकोर्ट के आदेश हवा में, आखिर कब जागेगा परिवहन विभाग

​इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर स्थानीय प्रशासन और परिवहन विभाग की लापरवाही को उजागर कर दिया है। माननीय उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) का सख्त आदेश है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली का उपयोग व्यावसायिक कार्यों या सवारियां ढोने के लिए कतई नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद ग्रामीण इलाकों में धड़ल्ले से नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

​स्थानीय लोगों का आरोप है कि धार्मिक मेलों और दर्शन स्थलों के मार्गों पर हर दिन दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉली यात्रियों से ठूंस-ठूंस कर चलाई जाती हैं। इन वाहनों की न तो कोई फिटनेस जांच होती है और न ही चालकों के पास वैध दस्तावेज होते हैं। सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे इन वाहनों पर पुलिस और आरटीओ (RTO) विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ती? लालापुर का यह हादसा उसी प्रशासनिक ढिलाई का नतीजा है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और घायलों का इलाज जारी है।

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