​RBI MPC Meeting 2026: रेपो रेट 5.25% पर स्थिर; गवर्नर संजय मल्होत्रा का मास्टर प्लान और अर्थव्यवस्था पर असर

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पश्चिम एशिया संकट के बीच RBI का बड़ा फैसला : रेपो रेट पर यथास्थिति, महंगाई और विकास दर को लेकर गवर्नर ने दी चेतावनी

​ओजस्वी किरण न्यूज़ ब्यूरो, नई दिल्ली | 05 जून, 2026

​​RBI MPC Meeting 2026 : के ताजा घटनाक्रम में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति समिति की बैठक के समापन पर एक बड़ा और संतुलित निर्णय लेते हुए। रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखने की घोषणा की है। गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में समिति ने ‘न्यूट्रल’ स्टैंड को बरकरार रखा है।

आज की इस घोषणा ने न केवल बाजार की अनिश्चितता को दूर किया है, बल्कि वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक स्पष्ट दिशा भी तय की है।

​रेपो रेट 5.25% पर स्थिर : ‘विकास बनाम महंगाई’ का द्वंद्व

​गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण एक बड़े ‘ग्लोबल शॉक’ का सामना कर रही है।

आरबीआई की मौद्रिक नीति का मुख्य उद्देश्य विकास दर को बनाए रखना और मुद्रास्फीति को काबू में करना है। विशेषज्ञों और बाजार की उम्मीदों के अनुरूप ही आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है।

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​पश्चिम एशिया संघर्ष और भारत पर प्रहार : 5 ट्रांसमिशन चैनल

​आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने उन पांच प्रमुख रास्तों को रेखांकित किया है, जिनसे पश्चिम एशिया का संघर्ष भारत की आर्थिक नसों को प्रभावित कर रहा है:

​आयातित महंगाई : कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतें भारत के आयात बिल को बढ़ा रही हैं, जिससे आयातित महंगाई का खतरा बढ़ गया है।

​उत्पादन में गिरावट : ऊर्जा और उर्वरक बाजार में सप्लाई चेन बाधित होने से घरेलू औद्योगिक उत्पादन में गिरावट की संभावना है।

​निवेश में झिझक : वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के चलते बाजार में जोखिम लेने वालों की कमी आई है, जिसका असर निवेश और उपभोग पर पड़ सकता है।

​निर्यात और रेमिटेंस : वैश्विक मंदी की आहट से भारत के निर्यात और विदेशी रेमिटेंस में कमी देखी जा रही है।

​वित्तीय बाजार की तंगी : बाजार में अस्थिरता के कारण वित्तीय स्थितियां कड़ी हो गई हैं, जिससे ऋण प्रबंधन एक चुनौती बन गया है।

​महंगाई और विकास दर के ताजा आंकड़े (FY27 Projection)

​आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने पूर्वानुमानों को अपडेट किया है, जो आने वाले समय के लिए एक सतर्कता भरा संकेत है:

​महंगाई दर (CPI): आरबीआई का अनुमान है कि Q1 में 4.0%, Q2 में 4.4%, Q3 में 5.2% और Q4 में 4.7% महंगाई दर रह सकती है।

​GDP ग्रोथ: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए 6.9% की कुल विकास दर का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें तिमाही दर तिमाही (Q1 6.8%, Q2 6.7%, Q3 7.0%, Q4 7.2%) सुधार की उम्मीद है।

​गवर्नर की दो टूक : ‘आपूर्ति का झटका, मांग का झटका बन सकता है’

​गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चेतावनी देते हुए कहा है। कि यदि सप्लाई चेन की बहाली में देरी होती है।  तो यह शुरुआती सप्लाई शॉक मध्यम अवधि में ‘डिमांड शॉक’ में बदल सकता है।

आरबीआई गवर्नर ने साफ किया कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की बढ़ती कीमतें। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा ‘वाइल्डकार्ड’ बनी हुई हैं। जिस पर आरबीआई की कड़ी नजर है।

​भारत के पास है आर्थिक सुरक्षा कवच

​गवर्नर मल्होत्रा ने विश्वास दिलाया कि भारत की आर्थिक नींव पिछले संकटों की तुलना में काफी मजबूत है। साथ ही, भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार, बैंकों की स्वस्थ बैलेंस शीट और निरंतर घरेलू मांग मौजूद है।

जो देश को किसी भी बाहरी झटके से बचाने के लिए एक बफर की तरह काम कर रहे हैं।

​ओजस्वी किरण विश्लेषण: भविष्य की राह

​आरबीआई का यह निर्णय देश की आर्थिक नब्ज को थामने वाला है। ‘न्यूट्रल’ रुख का स्पष्ट अर्थ है कि आरबीआई अब आगामी महंगाई के आंकड़ों और मानसून के प्रभाव के आधार पर अगला कदम उठाएगा।

अंततः, ओजस्वी किरण की नजर इस बात पर बनी रहेगी कि आरबीआई भविष्य में किन संकेतकों को अपनी प्राथमिकता बनाता है।

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