लखनऊ अग्निकांड: ‘मौत के सौदागरों’ की कब्र बनेगी अवैध इमारतें, कब जागेगा सिस्टम?

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लखनऊ अग्निकांड स्थल पर जांच करती पुलिस और अधिकारी
लखनऊ अग्निकांड के बाद घटनास्थल का जायजा लेते अधिकारी और जांच टीम।

लखनऊ अग्निकांड: ‘मौत के सौदागरों’ की कब्र बनेगी अवैध इमारतें, कब जागेगा सिस्टम?

ओजस्वी किरण ग्राउंड जीरो, लखनऊ। अलीगंज के सेक्टर-डी में हुए भीषण लखनऊ अग्निकांड ने यह साबित कर दिया है कि राजधानी में जिंदगी की कीमत महज एक ‘रिश्वत’ है। ‘ओजस्वी किरण’ की टीम जब घटनास्थल पर पहुंची, तो जली हुई दीवारों की राख उस भ्रष्ट व्यवस्था की चीखें सुना रही थी, जिसे ‘सिस्टम प्रायोजित हत्या’ के अलावा और कुछ नहीं कहा जा सकता। यह लखनऊ अग्निकांड उन कुर्सी पर बैठे अफसरों के मुंह पर एक करारा तमाचा है, जिन्होंने अपनी जेबें भरने के लिए शहर को ‘मौत का चैंबर’ बना दिया है।

“लखनऊ अग्निकांड: सिर्फ निलंबन का ‘नाटक’ क्यों?”

चार लोगों को सस्पेंड और तीन को गिरफ्तार कर प्रशासन जिस तरह अपनी पीठ थपथपा रहा है, वह जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। क्या चंद प्यादों पर कार्रवाई से उन मासूमों की जान वापस आ जाएगी? जनता का आक्रोश अब सड़कों पर उबल रहा है। सवाल यह है—इन ‘मौत के सौदागरों’ को खुली छूट देने वाले वो रसूखदार ‘आका’ कब बेनकाब होंगे? यह महज एक बिल्डिंग का हादसा नहीं है, यह एक ‘सड़ती हुई व्यवस्था’ का चेहरा है। जब तक हर अवैध निर्माण को नेस्तनाबूद नहीं किया जाता, तब तक यह क्लीनअप का नाटक बंद होना चाहिए।

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” जनता की दहाड़: नोटिस नहीं, अब बुलडोजर चले”

लखनऊ की फिजा में धुआं नहीं, अब आग है। जनता अब गिड़गिड़ा नहीं रही, बल्कि अपना हक छीनने को तैयार है। हमारी स्पष्ट मांगें हैं:

नक्शा पास नहीं, तो बुलडोजर तैयार रहे: शहर के हर उस व्यावसायिक केंद्र को जमींदोज किया जाए जो रेजिडेंशियल इलाकों में अवैध रूप से धंधा चला रहे हैं और जिनके पास फायर NOC का नामोनिशान नहीं है। अब नोटिस की खानापूर्ति नहीं, सीधे मिट्टी में मिलने वाली कार्रवाई चाहिए।

बिजली विभाग के दरिंदों पर हत्या का केस: नियमों को ताक पर रखकर अवैध निर्माणों को बिजली का कनेक्शन देने वाले विभागीय अधिकारियों पर सीधे हत्या का मुकदमा दर्ज हो।

जवाबदेही तय हो: कब तक मासूमों की लाशों पर राजनीति होती रहेगी? प्रशासन यह जान ले कि अगर आज बुलडोजर नहीं चला, तो कल सड़कों पर उतरे जनसैलाब को संभालना नामुमकिन होगा।

इस अग्निकांड से जुड़ी पल-पल की जानकारी और सरकारी एक्शन रिपोर्ट यहाँ देखें: अग्निकांड अपडेट्स – यहाँ क्लिक करें :-https://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/lucknow/lucknow-coaching-centre-fire-accident-live-updates-cm-yogi-adityanath-sit-report-fir-postmorterm-last-cremation-action-gaming-zone-livenews-10594825.html](https://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/lucknow/lucknow-coaching-centre-fire-accident-live-updates-cm-yogi-adityanath-sit-report-fir-postmorterm-last-cremation-action-gaming-zone-livenews-10594825.html

” क्या हमारा शहर ‘मौत का जाल’ बन चुका है?”

‘ओजस्वी किरण ग्राउंड जीरो’ का साफ सवाल है—क्या लखनऊ का हर छात्र जो अपनी किस्मत संवारने के लिए कोचिंग जाता है, वह वसीयत लिखकर निकले? यह कैसा विकास है जहाँ कोचिंग सेंटर्स और लाइब्रेरी मौत के चैंबर बनकर खड़े हैं?

चीखें दबी थीं उस धुएं के गुबार में,

जिंदगी तड़प रही थी उस खामोश दीवार में।

मुनाफे की हवस ने, मौत का जाल बिछाया था,

रिहायशी घर को, बारूद का घर बनाया था।

चेतावनी को कुचला, शिकायतों को अनसुना किया,

सिस्टम ने चंद सिक्कों में, अपना जमीर बेच दिया।

अब राख से उठती ये लपटें, जवाब मांग रही हैं,

बेगुनाह लाशें, उस कुर्सी से हिसाब मांग रही हैं।

अब तो तड़प को तुम राख में न दबाओ,

ऐ हुक्मरानों! जनता की इस दहाड़ को समझ जाओ।

अवैध निर्माण की हर ईंट, अब जमींदोज हो,

तभी असली इंसाफ, इस शहर का रोज हो।

प्रशासन जागे, बुलडोजर चले और व्यवस्था सुधरे—यही जनता की मांग है। अब नहीं तो कब?

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