मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री ने नवाचार को महानगरों से आगे बढ़ाने का दिया संदेश

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लखनऊ में आयोजित हुआ सीएसआईआर स्टार्टअप कॉन्क्लेव

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री ने नवाचार को महानगरों से आगे बढ़ाने का दिया संदेश

डॉ. जितेंद्र सिंह ने लखनऊ में देश के पहले स्वस्तिक आकार के ‘कमल उद्यान’ का किया उद्घाटन

ओजस्वी किरण ब्यूरों
लखनऊ । विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित 2-दिवसीय स्टार्टअप कॉन्क्लेव का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में संबोधन किया।

इस मौके पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीएसआईआर-नेशनल बॉटेनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट में देश के पहले स्वस्तिक आकार के कमल उद्यान का उद्घाटन किया। 930 वर्ग मीटर में फैले इस अनूठे उद्यान में दुनिया भर से एकत्र की गई 60 किस्मों के कमल और 50 प्रजातियों की वॉटर लिली प्रदर्शित हैं। इसकी वैज्ञानिक देखरेख में एनबीआरआई-नमो 108 कमल, जो दुनिया का पहला 108 पंखुड़ियों वाला कमल है, विशेष आकर्षण का केंद्र है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह उद्यान जैव विविधता संरक्षण, उद्यमिता और पर्यटन का नया केंद्र बनेगा। उन्होंने इसे फ्लोरीकल्चर, वेलनेस और कृषि-आधारित उद्योगों के लिए नए अवसरों का मंच बताया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीएसआईआर की पहल की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की विशाल संस्थागत क्षमता और कुशल मानव संसाधन देश की विज्ञान और स्टार्टअप यात्रा में बड़ी भूमिका निभाएंगे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि लखनऊ में इस आयोजन का उद्देश्य विज्ञान एवं नवाचार कार्यक्रमों को दिल्ली से बाहर ले जाकर देशभर के आकांक्षी शहरों तक पहुँचाना है। उन्होंने बताया कि भारत के लगभग 50% स्टार्टअप अब टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहे हैं। 2015 में शुरू हुए स्टार्टअप इंडिया अभियान की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 350 स्टार्टअप से बढ़कर आज भारत में 2 लाख से अधिक स्टार्टअप हैं, जिनमें लगभग 60% महिलाओं के नेतृत्व में हैं।

उन्होंने लखनऊ के वैज्ञानिक योगदान का भी उल्लेख किया—जैसे नमो 108 कमल, कीट-प्रतिरोधी कपास, फ्लोरीकल्चर मिशन से किसानों के लिए नए रोजगार विकल्प, और स्थानीय स्तर पर विकसित 13 नई दवाएं जिनमें कैंसर और फैटी लिवर की दवा भी शामिल है।

मिंट (पुदीना) आधारित उत्पादों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लखनऊ ही वह स्थान है जहां से दुनिया भर में प्रचलित मेंटॉल उत्पाद और मिंट टैबलेट की शुरुआत हुई। आज यहां वैज्ञानिक हर्बल माउथ फ्रेशनर जैसे नए उत्पादों पर काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “लखनऊ सिर्फ इमामबाड़े जैसे स्मारकों के लिए ही नहीं जाना जाएगा, बल्कि 108 पंखुड़ियों वाला कमल और मिंट उत्पाद जैसी नवाचारों के लिए भी जाना जाएगा। यही नया भारत का चेहरा है।”

केंद्रीय मंत्री ने प्रदेश में राष्ट्रीय क्वांटम मिशन सेंटर (नोएडा), सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का पुनर्जीवन, और लखनऊ में बायोटेक्नोलॉजी पार्क एवं साइंस म्यूज़ियम की स्थापना जैसी योजनाओं का भी उल्लेख किया।

युवाओं की भूमिका पर उन्होंने कहा कि उद्यमी बनने के लिए पीएचडी डिग्री जरूरी नहीं है। “आज कई सफल स्टार्टअप ऐसे युवाओं ने बनाए हैं जिनके पास ऊँची डिग्रियां नहीं थीं लेकिन कौशल और फोकस था। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा निर्मित पारिस्थितिकी तंत्र से हर प्रतिभाशाली युवा को प्रशिक्षण, फंडिंग और मेंटरशिप मिल रही है।”

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वैज्ञानिकों, उद्यमियों और उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया। स्टार्टअप कॉन्क्लेव और स्वस्तिक कमल उद्यान के उद्घाटन के साथ, लखनऊ ने खुद को भारत के वैज्ञानिक और उद्यमी परिदृश्य में एक उभरते केंद्र के रूप में स्थापित किया है।

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