उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह द्वारा INDUS FOOD–2026 में उत्तर प्रदेश पवेलियन का उद्घाटन
पवेलियन में प्रदेश के 20 भौगोलिक संकेतक (GI) उत्पादों की भव्य गैलरी का प्रदर्शन
110 देशों के अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के समक्ष उत्तर प्रदेश की निर्यात क्षमता का प्रदर्शन
ओजस्वी किरण ब्यूरो नोएडा
नोएडा। प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने बृहस्पतिवार को नोएडा में आयोजित INDUS FOOD–2026 के हॉल नंबर–8 में निदेशालय कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार द्वारा स्थापित उत्तर प्रदेश पवेलियन का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के निर्यात-योग्य कृषि एवं प्रसंस्कृत उत्पादों के प्रदर्शन का अवलोकन किया और निर्यातकों का उत्साहवर्धन किया। यह आयोजन उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पादों को वैश्विक मंच प्रदान करने और किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार का एक बड़ा कदम है।
उद्घाटन के पश्चात उद्यान मंत्री ने पवेलियन में प्रतिभाग कर रहे छह प्रमुख निर्यातकों के स्टालों का भ्रमण किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के 20 विशिष्ट भौगोलिक संकेतक (GI) उत्पादों पर आधारित विशेष गैलरी का भी गहराई से अवलोकन किया। श्री सिंह ने प्रदेश की विशिष्ट पहचान वाले इन उत्पादों की गुणवत्ता और प्रामाणिकता की सराहना करते हुए कहा कि वैश्विक बाजार में उत्तर प्रदेश के उत्पादों की मांग निरंतर बढ़ रही है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इनकी बेहतर ब्रांडिंग से प्रदेश के निर्यात को नई गति मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि इस अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी INDUS FOOD–2026 में विश्व के 32 देशों के अलग-अलग पवेलियन स्थापित किए गए हैं। इस मेगा इवेंट में दुनिया भर के 110 देशों से आए अंतरराष्ट्रीय आयातक और खरीदार हिस्सा ले रहे हैं। भारत के भी लगभग 11 राज्यों ने अपने पवेलियन के माध्यम से अपनी निर्यात क्षमताओं का प्रदर्शन किया है। उत्तर प्रदेश पवेलियन इस आयोजन में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जहाँ प्रदेश की कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की ताकत को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया गया है।
इस अवसर पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कई देशों के प्रतिनिधि और प्रमुख निर्यातक उपस्थित रहे।
इस अवसर पर उद्यान मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के इस प्रयास का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के निर्यातकों एवं उत्पादकों को सीधे वैश्विक खरीदारों से जोड़ना है। इससे न केवल कृषि निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पादों के प्रदर्शन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।

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