स्टार्टअप इंडिया के 10 साल : नए ग्रोथ सेक्टर्स के साथ भारत की अर्थव्यवस्था को मिली नई दिशा
ओजस्वी किरण डेक्स
स्टार्टअप इंडिया पहल के 10 वर्ष पूरे होने पर भारत की विकास यात्रा में एक बड़ा परिवर्तन साफ दिखाई देता है। एक दशक पहले भारत में नवाचार की कमी नहीं थी, लेकिन नए क्षेत्रों के उभरने के लिए आवश्यक रास्ते और समर्थन तंत्र कमजोर थे। शुरुआती पूंजी का अभाव, सीमित बाजार, नियामकीय अनिश्चितता और असफलता पर कठोर दंड के कारण कई संभावनाशील सेक्टर्स मुख्यधारा में नहीं आ पाते थे। वर्ष 2016 में शुरू की गई स्टार्टअप इंडिया पहल ने इस स्थिति को बदला और भारत के नए ग्रोथ सेक्टर्स के लिए मजबूत आधार तैयार किया।
स्टार्टअप इंडिया का पहला बड़ा प्रभाव इसके व्यापक विस्तार में दिखाई देता है। वर्ष 2014 में बिखरे हुए स्टार्टअप प्रयासों की तुलना में आज भारत में 2.09 लाख से अधिक डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स सक्रिय हैं। यह विस्तार केवल संख्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इन स्टार्टअप्स ने 21 लाख से अधिक रोजगार सृजित किए और भारत को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बना दिया। वर्ष 2025 में अकेले 44,000 से अधिक नए स्टार्टअप जुड़े, जो इस पहल की मजबूती और परिपक्वता को दर्शाता है। खास बात यह रही कि इसी अवधि में स्टार्टअप बंद होने की दर पांच साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंची, जिससे स्पष्ट हुआ कि अब स्टार्टअप केवल प्रयोग नहीं, बल्कि टिकाऊ व्यवसाय बन रहे हैं।
नए सेक्टर्स के उभार में पूंजी की भूमिका निर्णायक रही। स्टार्टअप इंडिया के तहत पूंजी को केवल वित्तीय साधन नहीं, बल्कि नीति के रूप में इस्तेमाल किया गया। ₹945 करोड़ की स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम ने शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को विचार से प्रोटोटाइप और बाजार तक पहुंचने में मदद की। वहीं, ₹10,000 करोड़ के ‘फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स’ के जरिए निजी निवेश को प्रोत्साहित कर 1,270 से अधिक स्टार्टअप्स तक पूंजी पहुंचाई गई। क्रेडिट गारंटी स्कीम के माध्यम से बिना जमानत ऋण उपलब्ध कराकर नवाचार आधारित कंपनियों को वित्तीय विश्वसनीयता भी मिली।
रक्षा क्षेत्र इस बदलाव का प्रमुख उदाहरण बनकर उभरा। लंबे समय तक रक्षा नवाचार सार्वजनिक संस्थानों तक सीमित था, लेकिन आज ड्रोन, निगरानी प्रणाली और एडवांस्ड मटीरियल जैसे क्षेत्रों में 1,000 से अधिक रक्षा स्टार्टअप सक्रिय हैं। iDEX जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से नवाचार को सीधे सरकारी मांग से जोड़ा गया, जिससे प्रयोग से आगे बढ़कर तैनाती योग्य समाधान विकसित हुए।
अंतरिक्ष क्षेत्र में भी बड़ा परिवर्तन देखने को मिला। नियामकीय सुधारों और निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के बाद भारत में अंतरिक्ष स्टार्टअप्स की संख्या 2014 में एक से बढ़कर 380 से अधिक हो गई है। सैटेलाइट, लॉन्च व्हीकल और स्पेस एप्लिकेशन जैसे क्षेत्रों में भारत अब एक उभरता हुआ वैश्विक खिलाड़ी बन रहा है।
तकनीक का असर अब वास्तविक अर्थव्यवस्था में भी दिख रहा है। कृषि क्षेत्र में करीब 5,000 एग्रीटेक स्टार्टअप्स पूरे वैल्यू चेन में काम कर रहे हैं। इसी तरह, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब प्रयोग नहीं, बल्कि आधारभूत ढांचे के रूप में उभर रहा है, जहां सैकड़ों स्टार्टअप्स वित्त, स्वास्थ्य और शासन जैसे क्षेत्रों में समाधान दे रहे हैं।
स्टार्टअप इंडिया के 10 साल यह साबित करते हैं कि यह पहल केवल स्टार्टअप्स की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि नए सेक्टर्स के निर्माण और भारत की दीर्घकालिक आर्थिक क्षमता को मजबूत करने की कहानी है।

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