फरवरी तक गंगा एक्सप्रेसवे होगा तैयार, यूपी की कनेक्टिविटी को मिलेगी तेज़ रफ्तार: मुख्यमंत्री

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फरवरी तक गंगा एक्सप्रेसवे होगा तैयार, यूपी की कनेक्टिविटी को मिलेगी तेज़ रफ्तार: मुख्यमंत्री

जेवर एयरपोर्ट फेज-3 भूमि अधिग्रहण तेज करने के निर्देश, कहा; नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुभारंभ से एयर कार्गो का हब होगा उत्तर प्रदेश

मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब और ट्रांसपोर्ट हब निर्माण तेज करने के निर्देश

मध्य गंगा नहर, एरच, रिहंद-ओबरा विद्युत परियोजना की भी हुई समीक्षा

ओजस्वी किरण डेक्स

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में प्रदेश की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंचाई, ऊर्जा, शिक्षा और औद्योगिक विकास परियोजनाओं की व्यापक समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाएँ उत्तर प्रदेश को तेजी से आर्थिक समृद्धि और निवेश के नए केंद्र के रूप में स्थापित कर रही हैं, और इन सभी योजनाओं को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि फरवरी, 2026 के अंत तक गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य पूर्ण कराया जाए। उन्होंने कहा कि 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे प्रदेश की कनेक्टिविटी को ऐतिहासिक मजबूती प्रदान करेगा और यह औद्योगिक, कृषि तथा लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के लिए एक मजबूत आधार बनेगा। बैठक में बताया गया कि यह एक्सप्रेसवे 12 जनपदों से होकर गुजरता है और 500 से अधिक गांवों को सीधा लाभ पहुंचाएगा। सड़क गुणवत्ता के आकलन के लिए रफनेस इंडेक्स और राइडिंग कम्फर्ट इंडेक्स जैसे आधुनिक तकनीकी मानकों के आधार पर परीक्षण किए जा रहे हैं। वे-साइड अमेनिटीज, रेस्ट एरिया, रोड सेफ्टी फीचर्स, साइनेज और एक्सेस-कंट्रोल सिस्टम को उच्च मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है।

मध्य गंगा नहर परियोजना (स्टेज-2) की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंचाई परियोजनाएं कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। बैठक में बताया गया कि इस परियोजना के पूर्ण होने से अमरोहा, मुरादाबाद और संभल जनपदों के बड़े कृषि क्षेत्र में सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

एरच सिंचाई परियोजना की समीक्षा के दौरान बताया गया कि यह परियोजना बुंदेलखंड क्षेत्र में जल संरक्षण, सिंचाई और पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। परियोजना से कृषि कार्यों को स्थायित्व मिलेगा और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री ने इस परियोजना से जुड़े अपूर्ण कार्यों को अविलंब पूरा कराने के निर्देश दिए।

रिहंद एवं ओबरा क्षेत्र की जल विद्युत परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक है। बैठक में बताया गया कि रिहंद-ओबरा क्षेत्र में पंप स्टोरेज आधारित परियोजनाएं भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने और नवीकरणीय ऊर्जा के प्रभावी उपयोग में सहायक होंगी।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने फेज-3 के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जेवर एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश की वैश्विक कनेक्टिविटी, निवेश और रोजगार सृजन का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है। इसके शुभारंभ से उत्तर प्रदेश एयर कार्गो हब के रूप में नई संभावनाओं को आगे बढ़ाने वाला है। इसलिए इसके आगामी चरणों की तैयारी समय रहते सुनिश्चित की जाए। बैठक में बताया गया कि एयरपोर्ट के प्रथम चरण के संचालन से प्रतिवर्ष एक करोड़ से अधिक यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

ग्रेटर नोएडा में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने इन परियोजनाओं की कार्यवाही को तेज करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने इन परियोजनाओं के लिए प्रस्तावित रेलवे स्टेशनों के निर्माण आदि के लिए भारत सरकार के सम्बंधित मंत्रालयों से निरंतर संवाद बनाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ होने से उद्योगों की लागत में कमी आएगी और उत्तर प्रदेश मैन्युफैक्चरिंग व सप्लाई-चेन का प्रमुख केंद्र बनेगा।

मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूल योजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और समग्र शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 75 जनपदों में 150 मुख्यमंत्री मॉडल स्कूल स्थापित किए जाने हैं, जिनमें आधुनिक कक्षाएं, विज्ञान प्रयोगशालाएं, डिजिटल लर्निंग सुविधाएं, खेल एवं सह-शैक्षिक गतिविधियों के लिए समुचित अवसंरचना विकसित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मॉडल स्कूलों की स्थापना से जुड़े कार्यों में तेजी लाई जाए तथा जिन जनपदों में अब तक भूमि का चयन नहीं हो पाया है, वहां स्थानीय प्रशासन के सहयोग से तत्काल भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी की जाए, ताकि योजना को निर्धारित समयसीमा में धरातल पर उतारा जा सके। विशेष बैठक में चिल्ला एलिवेटेड फ्लाईओवर के कार्यों में भी तेजी की जरूरत बताई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास का अर्थ केवल निर्माण नहीं, बल्कि समय पर, गुणवत्तापूर्ण और जन-उपयोगी परियोजनाओं को धरातल पर उतारना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी प्रमुख परियोजनाओं की नियमित समीक्षा करते हुए कार्यों को तेज़ी से आगे बढ़ाया जाए, ताकि प्रदेश की विकास यात्रा निरंतर मजबूती के साथ आगे बढ़ती रहे।

महत्वपूर्ण बैठक में दिल्ली-मुम्बई इंडस्ट्रियल कॉरीडोर और बहराइच-श्रावस्ती-बलरामपुर-सिद्धार्थनगर-संतकबीरनगर रेल लाइन कनेक्टिविटी के विस्तार पर चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि बहराइच-श्रावस्ती-बलरामपुर-सिद्धार्थनगर नई रेल लाइन परियोजना सीमावर्ती और आकांक्षात्मक जिलों को रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस परियोजना से क्षेत्रीय विकास, व्यापारिक गतिविधियों और यात्रियों की सुविधा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री ने परियोजना के अनुसार भूमि उपलब्धता के लिए जिलाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

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