सोरांव के दो लेखपाल एक लाख रिश्वत के साथ गिरफ्तार ऑफिस बनाकर ले रहे थे घूंस, एंटी करप्शन टीम ने पकड़ा

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सोरांव के दो लेखपाल एक लाख रिश्वत के साथ गिरफ्तार
ऑफिस बनाकर ले रहे थे घूंस, एंटी करप्शन टीम ने पकड़ा

  ओजस्वी किरण ब्यूरों

प्रयागराज। एंटी करप्शन टीम ने दो लेखपालों को एक लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। महिला और पुरुष लेखपाल ने बकायदा एक कमरे का ऑफिस बना रखा था और जमीन संबंधित विवादों को वहां निपटाते थे। आख्या लगाने और मकान निर्माण कार्य को न रुकवाने के एवज ने दोनों ने एक लाख रुपये की डिमांड की थी। एंटी करप्शन टीम ने प्लान बनाकर ट्रैफिंग की और एक लाख रुपये घूंस लेते हुए दोनों को रंगे हाथ दबोच लिया।।सोरांव तहसील के दोनों लेखपालों को शिवकुटी थाने लाकर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। गिरफ्तार किए गए लेखपालों की पहचान राजशेखर (मलाक हरहर) और जूही मिश्रा (महरू डीह) के रूप में हुई है। टीम ने शिकायत मिलने के बाद जाल बिछाकर उन्हें पकड़ा।
बताया जाता है कि दोनों लेखपाल 2024-25 बैच के हैं और सोरांव तहसील में उनकी यह पहली पोस्टिंग थी। राजशेखर फतेहपुर जनपद के निवासी हैं, जबकि जूही मिश्रा सुल्तानपुर की रहने वाली हैं। लंबे समय से उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतें मिल रही थीं। लेखपालों ने एक कमरा किराए पर लेकर उसे अपना ‘ऑफिस’ बना रखा था। यहीं पर वे क्षेत्रीय लोगों से संबंधित कामकाज निपटाते थे और पैसों का लेनदेन भी करते थे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नवाबगंज के आनापुर के रहने वाले अभयराज यादव पुत्र शंकरलाल यादव ने एंटी करप्शन में शिकायत दर्ज कराई थी। अपने प्रार्थना पत्र में कहा कि राजशेखर लेखपाल तहसील सोरांव उनसे रिश्वत की मांग कर रहा है। उन्होंने बताया कि उसकी पुश्तैनी जमीन पर आख्या लगाने और निर्माण कार्य न रोकने के एवज में 1,00,000 रुपये मांगे जा रहे हैं।
अभयराज की शिकायत पर गुरुवार को एंटी करप्शन टीम की 14 सदस्यीय टीम ने ट्रैपिंग की। इंस्पेक्टर अलाउद्दीन अंसारी के नेतृत्व में शिवपुर मलाका लखनऊ रोड प्रयागराज के पास से लेखपाल राजशेखर सिंह को गिरफ्तार कर लिया। उसके साथ ही जूही मिश्रा पुत्री स्वामीनाथ मिश्र निवासी लक्ष्मणपुर थाना टांडा जनपद अम्बेडकर नगर को पकड़ा गया। जूही का हाल पता न्याय नगर थाना धूमनगंज है।
दोनों के कब्जे से रिश्वत के एक लाख रुपये ट्रैपिंग टीम ने बरामद किए। यह वहीं रुपये थे, जो अभयराज के जरिए रिश्वत दी गई थी। जूही अपने साथी लेखपाल राजशेखर के साथ मिलकर रिश्वतखोरी कर रही थीं। दोनों ने आफिस बनाकर घूस लेने का काम शुरू किया था।

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