एसआरएन अस्पताल में ऑटो मशीनों से सफाई शुरू, सिर के चोट की अब होगी सटीक जांच, छेनी-हथौड़ी की नहीं पड़ेगी जरूरत

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एसआरएन अस्पताल में ऑटो मशीनों से सफाई शुरू,

सिर के चोट की अब होगी सटीक जांच, छेनी-हथौड़ी की नहीं पड़ेगी जरूरत

ओजस्वी किरण ब्यूरो 

प्रयागराज। एसआरएन अस्पताल स्थित पोस्टपार्टम हाउस अब आधुनिक तकनीक से लैस होगा। स्वास्थ्य विभाग ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को सुगम और सटीक बनाने के लिए पांच नई ‘आक्सीलेटिंग इलेक्ट्रिक बोन शा’ मशीनें उपलब्ध कराई हैं। इन मशीनों की मदद से अब शवों का पोस्टमार्टम बिना हाथ लगाए एवं बिना पारंपरिक छीनी हथौड़ी के इस्तेमाल के किया जा सकेगा। पोस्टमार्टम प्रभारी डा. राजीव रंजन के अनुसार इस तकनीक से मस्तिष्क एवं शरीर के अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंचाए बिना सटीक जांच संभव होगी। विशेष रूप से सिर की चोटों का विश्लेषण अब और बेहतर तरीके से हो सकेगा। नई मशीनों के प्रयोग से न केवल पोस्टमार्टम की प्रकिया में तेजी आएगी, बल्कि डाक्टरों एवं कर्मचारियों में संक्रमण फैलने का खतरा भी काफी कम हो जाएगा। बतादें कि एसआरएन पोस्टमार्टम हाउस में रोजाना औसतन १० से १२ शवों का परीक्षण किया जाता है। इस नई व्यवस्था से समय की बचत होगी और पूरी प्रक्रिया अधिक मानवीय एवं वैज्ञानिक तरीके से संपन्न हो सकेगी।

एसआरएन अस्पतालमें पांच आटो मशीनों से सफाई शुरू,ट्रायल के बाद सभी वार्डों में होगा इसका इस्तेमाल

मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज से संबद्ध स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल की सफाई व्यवस्था को अब अत्याधुनिक बनाया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन ने सफाई के स्तर को बेहतर करने और समय की बचत के लिए पांच अत्याधुनिक ‘आटो क्लीनिक मशीनें’ मंगवाई हैं। इन मशीनों के जरिए अस्पतालों के वार्डों में सफाई का कार्य शुरू कर दिया गया है। अभी तक अस्पताल में साफ-सफाई का पूरा जिम्मा करीब ६५० सफाईकर्मियों पर था, जो मैनुअली (हाथों से) सफाई करते थे। ये कर्मचारी सात अलग-अलग बिल्डिंगों में स्थित १८ वार्डों के साथ-साथ फार्मेसी, जीएनएम एवं नर्सिंग स्कूलों की देखरेख करते हैं। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार वर्तमान में इन मशीनों का उपयोग ओटी (आपरेशन थिएटर) आईसीयू एवं ओपीडी क्षेत्रों में किया जा रहा है। यहां ट्रायल सफल होने के बाद चरणबद्ध तरीके से अस्पताल के अन्य सभी वार्डों में भी मशीनों से सफाई शुरू की जायेगी। आटो क्लीनिक मशीनों के इस्तेमाल से न केवल सफाई पहले से अधिक बेहतर होगी, बल्कि बड़े परिसरों को कम समय में संक्रमण मुक्त एवं स्वच्छ बनाया जा सकेगा।

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