मोमिन वह होता है जिसके मरने के बाद भी लोग उसकी फज़ीलत का ज़िक्र करें : मौलाना हमीदुल हसन
ओजस्वी किरण ब्यूरो प्रयागराज
प्रयागराज। मशहूर सहाफी (जर्नलिस्ट) ज़फ़र आग़ा के चालिसवें की मजलिस को खिताब करते हुए लखनऊ के मौलाना हमीदुल हसन क़िब्ला ने कहा इंसान वह अच्छा होता है जिसके इस दुनिया ए फानी से गुज़र जाने के बाद भी लोग उसे याद रखें।
रानी मण्डी स्थित इमामबाड़ा नवाब आग़ा महमूद साहब में हमेशा टीवी डीबेट में विदेशी मामलों के जानकार और एंकर सिनीयर जर्नलिस्ट ज़फ़र आग़ा के चालीसवें की मजलिस को खिताब करते हुए लखनऊ के प्रख्यात आलिमेदीन आयतुल्ला मौलाना हमीदुल हसन साहब ने कहा मोमिन वह होता है जिसके इस दुनिया ए फानी से गुज़र जाने के बाद भी उसके कामों की फज़ीलत बयान हो।ज़फ़र आग़ा एक ऐसे मर्दे मोमिन थे जो अपने हयात ए ज़िन्दगी में दीनी व दुनियावी कामों के साथ तमाम तन्ज़ीमों के ज़रिए लोगों की रहनुमाई किया करते थे।वहीं बेबाक ज़बान के मालिक थे।आज वह नहीं हैं लेकिन उनके गुज़र जाने के बाद भी इतनी बड़ी तादाद में लोगों का मजलिस ए चेहलुम में आना इस बात की गवाही है की मरहूम एक अज़ीम इन्सान ही नहीं एक अज़ीम शख्सियत की मानिंद थे।मौलाना ने पैग़म्बर और इमामो के शजरे के साथ करबला के शहीदों का ज़िक्र किया वहीं मजलिस से पहले रज़ा ईस्माइल सफवी ने सोज़ख्वानी के द्वारा कर्बला के शहीदों का तज़केरा किया। मौलाना आमिरुर रिज़वी , ज़ाकिर ए अहलेबैत रज़ा अब्बास जैदी ,क़मर आग़ा ,सफदर आग़ा ,मुनीश आग़ा ,हसन दानिश ,ज़फरुल हसन , हम्माद साहब ,मुफीद अब्बास आदि शामिल रहे।
सिनियर जर्नलिस्ट ज़फ़र आग़ा की याद में ताज़ियती जलसा आज
पी डब्लू ऐ ,जे एल एस व जे एस एम की ओर से करैली के ए एम ऑक्सफोर्ड इन्टर कालेज निकट लाईफ लाईन हास्पिटल में सोमवार दिनांक २९ अप्रैल को सांय ६:३० बजे मशहूर सहाफी (जर्नलिस्ट)ज़फ़र आग़ा की याद में शोक सभा (ताज़ियती जलसा)का आयोजन किया गया है जिसमें प्रलेस की संध्या नवोदिता ,जलेस के प्रोफेसर बसंत त्रिपाठी ,जसम के के०के०पाण्डेय अपने विचार रखेंगे।उक्त सूचना कन्विनर शाहिद अस्करी ने दी।

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