पत्रकारों की मांगों को लेकर राज्यपाल को सौंपा गया ज्ञापन कल्याणकारी योजनाओं की वकालत, शीघ्र कार्रवाई की उम्मीद

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पत्रकारों की मांगों को लेकर राज्यपाल को सौंपा गया ज्ञापन

कल्याणकारी योजनाओं की वकालत, शीघ्र कार्रवाई की उम्मीद

 ओजस्वी किरण ब्यूरों

लखनऊ। राज्य मुख्यालय उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति ने शुक्रवार को प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात कर पत्रकारों के हितों से जुड़ी कई अहम मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। समिति के प्रदेश महासचिव अरुण कुमार त्रिपाठी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से आग्रह किया कि वे पत्रकारों के कल्याण हेतु सरकार को आवश्यक निर्देश दें।

ज्ञापन में पत्रकारों के लिए 10 लाख रुपये के सामूहिक बीमा की मांग की गई है, ताकि आकस्मिक दुर्घटनाओं या आपातकालीन परिस्थितियों में उनके परिवारों को आर्थिक सहायता मिल सके। इसके साथ ही प्रत्येक जिले में गठित होने वाली जिला स्तरीय स्थायी समिति में समिति के प्रतिनिधि को पदेन सदस्य के रूप में शामिल करने की भी अपील की गई है।

अन्य प्रमुख मांगों में परिवहन निगम की बसों में पत्रकारों को सहयात्री की सुविधा, शस्त्र लाइसेंस में प्राथमिकता, पत्रकारों पर आपराधिक मामलों में अनावश्यक उत्पीड़न से सुरक्षा, पत्रकार आवास के लिए सहकारी समिति का गठन, सरकारी आवासों में पत्रकारों के लिए आवंटन, उत्तर प्रदेश प्रेस आयोग की स्थापना, मुख्यमंत्री पत्रकार पेंशन योजना का शीघ्र क्रियान्वयन, प्रेस टूर की पुनः शुरुआत और पत्रकारों व उनके परिवारजनों के लिए निःशुल्क चिकित्सा सुविधा शामिल हैं।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि पत्रकार समाज को जागरूक करने और जनमत तैयार करने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा, “मैं आप लोगों की समस्याओं को समझती हूं। सरकार से इन बिंदुओं पर कार्रवाई के लिए अवश्य पत्राचार करूंगी।”

इस मौके पर समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी अशोक कुमार नवरत्न, अनिल कुमार सिंह, अनिल त्रिपाठी, संतोष कुमार दीक्षित और परवेज़ अहमद भी मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात के उपरांत संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि राज्यपाल के सकारात्मक रुख से उम्मीद जगी है कि पत्रकारों की मांगों पर शीघ्र कार्रवाई होगी।

पत्रकारों ने यह भी कहा कि यदि इन मांगों को सरकार द्वारा मान लिया जाता है, तो इससे पत्रकारों का सामाजिक और पेशेवर जीवन अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक होगा। समिति ने यह स्पष्ट किया कि पत्रकारिता को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को सशक्त बनाने के लिए ये कदम अत्यंत आवश्यक हैं।

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