ओजस्वी किरण महा-इम्पैक्ट : खबर के बाद 48 घंटे में बदली SRN की सूरत; गेट पर स्ट्रेचर-पानी शुरू, पर व्यवस्था की गहरी पड़ताल अभी बाकी
“प्रयागराज (ओजस्वी किरण ब्यूरो)। जब पत्रकारिता का उद्देश्य सिर्फ सूचना देना नहीं बल्कि परिवर्तन लाना हो, तो परिणाम सुखद होते हैं। SRN अस्पताल प्रयागराज (स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल) की अव्यवस्थाओं को उजागर करती ‘ओजस्वी किरण’ की निर्भीक रिपोर्टिंग का ऐसा ‘महा-असर’ हुआ है कि महज़ 48 घंटे के भीतर अस्पताल की फिजा बदलने लगी है। प्रशासन ने मरीजों की तकलीफों को संज्ञान में लेते हुए तत्काल सुधार के कड़े कदम उठाए हैं।”
”SRN अस्पताल प्रयागराज की खबर का संज्ञान लेकर शासन द्वारा किए गए प्रशासनिक फेरबदल के बाद, नवनियुक्त प्रधानाचार्य डॉ. ए.के. वर्मा ने पदभार संभालते ही धरातल पर मोर्चा संभाल लिया है। उनके कल के औचक निरीक्षण का बड़ा असर आज देखने को मिला, जहाँ अस्पताल में मरीजों के लिए उन सुविधाओं का द्वार खुल गया है, जिनके लिए तीमारदार महीनों से तरस रहे थे।”
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🚑 SRN अस्पताल प्रयागराज के गेट पर अब मिलेगी राहत: स्ट्रेचर, पानी और पंखों का इंतजाम
कल के निरीक्षण में ‘ओजस्वी किरण’ की पड़ताल पर मुहर लगाते हुए SRN अस्पताल प्रयागराज के नए प्रधानाचार्य ने पाया था कि अस्पताल में स्ट्रेचर होने के बावजूद मरीजों को गेट पर नहीं मिल रहे थे। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए डॉ. वर्मा ने आज से नई व्यवस्था लागू कर दी है:
तत्काल सहायता : अब ट्रॉमा सेंटर के मुख्य प्रवेश द्वार पर ही गंभीर मरीजों के लिए स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है। 🚑
गर्मी से बचाव : भीषण लू और गर्मी को देखते हुए मुख्य गेट पर शीतल पेयजल (ठंडा पानी), बैठने की कुर्सियां और पंखों की व्यवस्था शुरू हो गई है। 🚰
जिम्मेदारी तय : इस पूरी व्यवस्था की निगरानी के लिए डॉ. जितेंद्र शुक्ला और डॉ. अनिल सिंह को कमान सौंपी गई है। मेजर डॉ. जितेंद्र शुक्ला ने स्पष्ट किया है कि मानवीय स्वास्थ्य सेवाओं में कोई कोताही अब बर्दाश्त नहीं होगी। 👮♂️
🏛️ प्रधानाचार्य का संकल्प:
“मरीज का सम्मान हमारी प्राथमिकता”
SRN अस्पताल प्रयागराज में आए इस बदलाव पर डॉ. ए.के. वर्मा ने संवेदनशीलता दिखाते हुए कहा :
“अस्पताल में आने वाला प्रत्येक मरीज और उसका परिजन सम्मान का हकदार है। ट्रॉमा सेंटर में गंभीर स्थिति के मरीज पहुंचते हैं, उन्हें तत्काल सहायता, पानी और बैठने की सुविधा देना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। हमारा प्रयास है कि मरीजों को अनावश्यक कठिनाई न हो।”🤝
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ओजस्वी किरण विशेष पड़ताल : क्या सिस्टम का ‘कोमा’ पूरी तरह खत्म होगा ?
SRN अस्पताल प्रयागराज में सुधारों की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन ‘ओजस्वी किरण’ की पड़ताल में कुछ ऐसे ‘नासूर’ भी सामने आए हैं, जिन पर नए प्रधानाचार्य का ध्यान जाना अभी शेष है। ये वो समस्याएं हैं जिन्हें खुद “ओजस्वी किरण के संपादक” ने धरातल पर झेला है:
MRI का ‘वेटिंग गेम’ : अस्पताल के भीतर न्यूरोलॉजी जैसे विभागों के गंभीर मरीजों को आज भी 3 महीने बाद की वेटिंग दी जा रही है। क्या कोई गंभीर मरीज अपनी सांसें 3 महीने तक रोक सकता है? सिफारिश के बिना आज भी जांच का होना टेढ़ी खीर है।
आयुष्मान कार्ड का ‘भूलभुलैया’ : केंद्र की सबसे बड़ी योजना SRN में लालफीताशाही का शिकार है। एक तीमारदार का पूरा दिन सिर्फ डॉक्टरों की ओपीडी और CMS दफ्तर की ‘मोहर’ लगवाने में निकल जाता है। इलाज से ज्यादा कागजों की अहमियत ने मरीजों का दम घोंट रखा है।
जन औषधि और दवाओं का खेल : अस्पताल के भीतर दवाओं का ‘आउट ऑफ स्टॉक‘ होना आम बात है। तीमारदारों को घंटों लाइन के बाद कहा जाता है कि दवा नहीं है, जिससे वे बाहर के निजी मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं खरीदने पर मजबूर हैं।
कर्मचारियों का व्यवहार और गंदगी : वार्डों में सफाई व्यवस्था आज भी चुनौती बनी हुई है। टॉयलेट के टूटे दरवाजे और गंदगी नई बीमारियों को न्यौता दे रहे हैं। ऊपर से कुछ कर्मचारियों का “हम तुम्हारे नौकर नहीं हैं” वाला रवैया मरीजों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है।
निष्कर्ष : ‘ओजस्वी किरण’ की नज़र, सुधार होने तक जारी रहेगा सफर
SRN अस्पताल प्रयागराज मे यह जो बदलाव हो रहा है।जनता के लिए यह खबर एक उम्मीद की किरण है। 48 घंटे में स्ट्रेचर और पानी की व्यवस्था तो शुरू हो गई है, लेकिन आयुष्मान योजना का सरलीकरण और MRI की वेटिंग खत्म होना अभी बाकी है। ‘ओजस्वी किरण’ नवनियुक्त प्रशासन की अच्छी पहल का स्वागत करता है, लेकिन हम तब तक शांत नहीं बैठेंगे जब तक गरीब मरीज को अस्पताल के भीतर पूर्ण पारदर्शी इलाज नहीं मिल जाता। हमारी नज़र अब उन ‘गुप्त कमरों’ और ‘फाइलों’ पर है जहाँ आयुष्मान की सांसें अटकी हुई हैं।
“जनता की आवाज़ बनी ‘ओजस्वी किरण’ की इस मुहिम पर क्या है आपकी राय ? हमसे जुड़ें और इस खबर को अपनों तक पहुँचाएं।”
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