यूजीसी बिल पर रोक के विरोध में लखनऊ में धरना,नए बिल को तत्काल लागू करने की मांग
ओजस्वी किरण ब्यूरों
लखनऊ। एससी एसटी ओबीसी छात्र एवं सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वाधान में यूजीसी द्वारा लाए गए नऐ कानून को सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक के विरोध में 1 फरवरी 2026 को राजधानी लखनऊ के डॉ. भीमराव अंबेडकर प्रतिमा स्थल, हजरतगंज में शिक्षक, छात्र, शोधार्थी एवं ओबीसी/एससी/एसटी सामाजिक संगठनों ने संयुक्त रूप से शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नए यूजीसी बिल को उच्च शिक्षा सुधार के लिए आवश्यक बताते हुए इसे तत्काल लागू किए जाने की मांग की।
धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे रामचन्द्र पटेल का कहना था कि नया यूजीसी बिल देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनका आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा बिल पर लगाई गई रोक से शिक्षा सुधारों की प्रक्रिया बाधित हो रही है, जिसका सीधा असर छात्रों और शिक्षण संस्थानों पर पड़ सकता है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वर्तमान उच्च शिक्षा प्रणाली कई चुनौतियों से जूझ रही है, जिनमें नियामकीय जटिलताएँ, गुणवत्ता में असमानता, सीमित शोध अवसर और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ना प्रमुख हैं। नया यूजीसी बिल इन समस्याओं के समाधान के लिए एक सुदृढ़ और आधुनिक ढांचा प्रदान करता है, जिससे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षा के मानकों में सुधार संभव होगा।
धरने के दौरान वक्ताओं ने यह भी कहा कि नया यूजीसी बिल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है, जो बहुविषयक शिक्षा, अकादमिक लचीलापन, डिजिटल पारदर्शिता और कौशल-आधारित शिक्षण को बढ़ावा देता है। उनका मानना है कि यदि बिल को लागू किया जाता है तो शोध, नवाचार और रोजगारपरक शिक्षा को नई दिशा मिलेगी।
प्रदर्शनकारियों ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करने में शिक्षा की भूमिका सर्वोपरि है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था में सुधार को रोकना देश के भविष्य के साथ अन्याय होगा।
धरना-प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से सौंपा गया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की रोक के संदर्भ में आवश्यक संवैधानिक एवं विधिक कदम उठाने तथा नए यूजीसी बिल को जनहित में शीघ्र लागू करने की मांग की गई।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और किसी प्रकार की अव्यवस्था की सूचना नहीं मिली। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि जब तक नए यूजीसी बिल को लागू करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रहेगा। उक्त प्रदर्शन में मुख्य रूप से रामचन्द्र पटेल, राजेश सिद्धार्थ, पीसी कुरील, पवन नाथ पासवान, सी एल राजन, मोहम्मद शईद सिद्दीकी, पी एन प्रसाद कममले कुमार रामविलास रावत डॉ० सत्यवती दोहरे राम विराज रावत एडो०शैलेंद्र गौतम एडो० शनी सिंह पटेल अब्दुल रहमान बौद्ध मती विमला देवी एडो०पंकज प्रसून आदि सैकड़ो लोग उपस्थित रहे।

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