माघ मेला प्रयागराज धर्म और खेल का संगम
ओजस्वी किरण ब्यूरों
प्रयागराज। प्रयागराज के संगम तट पर प्रतिवर्ष माघ मेला सदियों से आयोजित होता आ रहा है। यहाँ साधु-संत न केवल साधना करते हैं अपितु हिन्दू धर्म के विभिन्न पक्षों पर गहन चिंतन मनन भी होता है। स्पोर्ट्स ए वे ऑफ लाइफ संस्था हिन्दू धर्म एवं पौराणिक ग्रंथों में पिरोये हुऐ किन्तु विलुप्त जैसी स्थिति में बने हुऐ खेलों को खोजने, उनके प्रदर्शन एवं तमाम वर्णित प्रसंगों, आख्यानों को खेल का दर्जा देने के लिए अपना शिविर लगाकर एक अलग तरह की साधना ही पिछले तीन वर्षों से लगातार कर रही है। इस वर्ष रामायण के सुप्रसिद्ध प्रसंग एवं कहावत के रूप में स्थापित अंगद पाँव खेल की न केवल खोज की बल्कि उसका प्रदर्शन भी किया। संस्था के अध्यक्ष डॉ. कनिष्क पाण्डेय का कहना है कि अंगद पाँव को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए मुहिम शुरू की गई है। इसके नियम बना लिये गये हैं। अन्य खेलों की तरह अंगद पाँव खेल एसोसिएशन को पंजीकृत भी कराया जायेगा।
यही नहीं यह संस्था विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय खेल फुटबॉल को भी भारत में स्थापित करने के लिए मुहिम शुरू किये हुए है। डॉ. कनिष्क का कहना है कि ‘भारत की स्थिति फुटबॉल में बहुत ही निराशाजनक है। फीफा वर्ल्ड कप में हम क्वालिफाई करने से भी कोसों दूर रहते हैं। विश्व रैंकिंग में भारत 125वें से भी नीचे के पायदान पर है। फुटबॉल को देश के हर आयुवर्ग एवं समाज के सभी पक्षों से जोड़ने का काम स्पोर्टस ए वे ऑफ लाइफ द्वारा शुरू किया गया है। माघ मेला में इस वर्ष के शिविर में फुटबॉल को बड़ी संख्या में धार्मिक श्रद्धालुओं तक पहुंचाने की सफल मुहिम सम्पन्न हुई। शिविर में क्या बच्चे और क्या साधु संत सभी को फुटबॉल से 20 दिनों तक लगातार चली प्रतियोगिताओं से जोड़ा गया। लगभग हजार से ढेड हजार लोगों ने फुटबॉल पर अपना कौशल प्रदर्शन किया। माघ मेला में पधारे स्वामी क्षीर सागर ने तो यहाँ तक कहा कि फुटबॉल के मैदान में उतरना उतना ही आनन्द दायक है जितना की साधना की गहराईयों में उतरना। स्पोर्टस ए वे ऑफ लाइफ का मानना है कि खेलों को राष्ट्रधर्म बनाकर तमाम समस्याओं का समाधान खोजा जा सकता है। साथ ही भारत की धार्मिक संस्कृति से जोड़कर खेल संस्कृति विकसित करते हुऐ विश्व पटल पर देश को स्पोर्ट्स सुपर पॉवर बनाया जा सकता है।

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