पंचायत चुनाव टलने के प्रबल संकेत, जनगणना बनी सबसे बड़ी बाधा
ओजस्वी किरण डेक्स
लखनऊ। प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी और चौंकाने वाली तस्वीर सामने आ रही है। अप्रैल 2026 से प्रस्तावित जनगणना के मद्देनज़र पंचायत चुनावों के टलने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। जनगणना के लिए अधिसूचना जारी होते ही पूरी चुनावी प्रक्रिया पर ब्रेक लगना लगभग तय माना जा रहा है।सूत्रों के अनुसार, जनगणना शुरू होने से परिसीमन और आरक्षण की पूरी कवायद प्रभावित होगी। ऐसे में तय समय-सीमा के भीतर पंचायत चुनाव कराना प्रशासन के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। यही वजह है कि चुनाव टालने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि यदि पंचायत चुनाव स्थगित होते हैं तो मौजूदा ग्राम प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है। इस मुद्दे पर शासन स्तर पर मंथन तेज हो चुका है और उच्च स्तर पर लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। हालांकि अभी तक इस पर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन प्रशासनिक गलियारों में इसे लगभग तय माना जा रहा है। संकेत साफ हैं कि पंचायत चुनाव अपने तय समय पर होना मुश्किल है।
अब प्रदेश भर की पंचायतों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण मतदाताओं की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सरकार इस पूरे मामले पर आधिकारिक मुहर लगा सकती है, जिसके बाद पंचायत चुनाव की दिशा और दशा पूरी तरह साफ हो जाएगी।


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