मदर टेरेसा कॉन्वेंट स्कूल के बच्चों को आपदा प्रबंधन की दी गई जानकारी
ओजस्वी किरण संवाददाता
हण्डिया प्रयागराज। शनिवार को कस्बा हंडिया के लाला बाजार स्थित मदर टेरेसा कॉन्वेंट स्कूल के बच्चों को आपदा प्रबंधन से संबंधित जानकारी देने के लिए आपदा प्रबंधन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सीनियर कंसलटेंट अनुज तिवारी रहे जहां पर उनका विद्यालय परिवार के द्वारा बुके देकर जोरदार अभिनंदन किया गया। इस दौरान उनके द्वारा आपदा प्रबंधन से संबंधित विशेष जानकारी छात्र छात्राओं को दी गई साथ ही साथ आपदा प्रबंधन से निपटने की रणनीति भी बताई गई। कार्यक्रम के दौरान अनुज तिवारी ने बताया कि आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तात्पर्य किसी क्षेत्र में हुए उस विध्वंश अनिष्ट विपत्तियां या अत्यंत गंभीर घटना से है जो प्राकृतिक या मानव जनित कारणों से या दुर्घटनावश अथवा लापरवाही से घटित होती है तथा जिसमें बहुत बड़ी मात्रा में मानव जीवन की हानि होती है। आपदाएं प्रायः प्राकृतिक व मानव जनित होती है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के डायरेक्टर योगेश चंद्र यादव ने कहा कि अचानक होने वाली विध्वंशकारी घटनाएं जिसमें व्यापक भौतिक क्षति होती है तथा जान माल का नुकसान होता है इन आपदाओं को समझने तथा विभिन्न तकनीकी की सहायता से इसके दुष्प्रभाव को कम करने के लिए मानव द्वारा किए जाने वाले प्रबंध को आपदा प्रबंधन कहते हैं। कार्यक्रम में उपस्थित विद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी यीशु राज यादव ने बताया कि प्राकृतिक आपदाओं में उन घटनाओं को शामिल किया जाता है जिसमें मानव का कोई हाथ नहीं होता जैसे भूकंप सुनामी हिमस्खलन बिजली का गिरना बादल फटना आदि मानव जनित आपदाओं के अंतर्गत इमारत का ढलना परमाणु बम गिरना रासायनिक गैसों का रिसाव होना आदि है। यह घटनाएं मानव जनित भूल या दुर्घटना से घटित होती है जिसमें जान माल की क्षति होती है । विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ जयंती घोष ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के मामले में चीन के बाद भारत का दूसरा स्थान है भारत के भूभाग का लगभग 59% क्षेत्र भूकंप की संभावना वाला क्षेत्र है । भारत में सूखा बाढ़ समुद्री तूफान और भोपाल गैस त्रासदी जैसी घटनाएं बार-बार कहर ढाती रहती हैं। अतः भारत में एक मजबूत आपदा प्रबंधन तंत्र का होना आवश्यक है । कार्यक्रम का संचालन विद्यालय की अध्यापिका संध्या तिवारी ने सफलता पूर्वक किया।कार्यक्रम का समापन आभार व्यक्त करके प्रज्ञा शुक्ला द्वारा किया गया कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के अध्यापक के के दुबे आकांक्षा केसरवानी विजय भान कुशवाहा चंद्रकांत विश्वकर्मा अभिषेक पाल सुनील यादव आशीष यादव अंशिका शुक्ला रिंकी तिवारी विशाखा पांडेय गीतांजलि पांडेय शाहवर ज़ामिन जीशान ज़ामिन धर्मराज यादव राजीव यादव साक्षी तिवारी निधि रघुवंशी सफिया निजाम शिल्पा पांडेय अंजलि तिवारी आदि अध्यापकों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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