5 राज्यों के चुनाव में कांग्रेस को मिले बीजेपी से ज्यादा वोट, क्या लोकसभा चुनाव में भगवा पार्टी के लिए खतरे की घंटी?

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हाल ही में 5 राज्यों के लिए हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस को अच्छे मार्जिन से मात दी

लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल कहे जा रहे इन चुनावों में बीजेपी ने 3 बड़े राज्यों में जीत हासिल कर अपना दबदबा साबित किया

सिर्फ तेलंगाना में ही कांग्रेस को सांत्वना जीत मिली

 न्यूज़ डेक्स 

नई दिल्ली : लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल का रिजल्ट आ चुका है। बीजेपी इस सेमीफाइनल की निर्विवाद विजेता बन कर उभरी है। पार्टी ने मध्यप्रदेश और राजस्थान में बंपर जीत हासिल की। वहीं छत्तीगढ़ में भी उम्मीद के उलट कांग्रेस को धूल चटाई। कांग्रेस के लिए सिर्फ तेलंगाना ही सांत्वना जीत के रूप में आया। मुख्य रूप से पांच राज्यों के चुनाव परिणाम बीजेपी के लिए गदगद होने वाला मामला है। इन सब के बीच इन विधानसभा चुनाव में कुछ ऐसी चीजें हैं जो बीजेपी के लिए खतरे की घंटी हो सकती हैं। सबसे पहली बात है कि इन 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस कुल वोट के मामले में बीजेपी पर भारी पड़ी है।

इन 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को कुल 4.92 करोड़ वोट मिले हैं। वहीं, बीजेपी को 4.80 करोड़ वोट मिले हैं। राजस्थान, मध्यप्रदेश और तेलंगाना में बीजेपी को कांग्रेस के मुकाबले अधिक वोट मिले हैं। वहीं, तेलंगाना में कांग्रेस को बीजेपी के मुकाबले बहुत अधिक वोट मिले हैं। ऐसे में अकेले तेलंगाना के वोटों की संख्या की वजह से ओवरऑल वोट में कांग्रेस बीजेपी पर भारी पड़ी है। मध्यप्रदेश में बीजेपी को कांग्रेस से 36 लाख वोट अधिक मिले हैं। वहीं, राजस्थान में भी बीजेपी को कांग्रेस पर 9 लाख वोटों की बढ़त है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और बीजेपी के वोटों का अंतर 6 लाख मतों का है। तेलंगाना में बीजेपी को 32 लाख तो कांग्रेस को 92 लाख वोट मिले।

इस विधानसभा चुनाव में जो सबसे अहम बात है वो है कि कांग्रेस ने तेलंगाना में क्षेत्रीय दल का दबदबा तोड़ा है। काफी लंबे अरसे बाद यह शायद पहली बार है जब किसी राष्ट्रीय पार्टी ने क्षेत्रीय दल का दबदबे को इस एकतरफा अंदाज में चुनौती दी हो। ऐसे में यह बात बीजेपी के साथ ही क्षेत्रीय दलों को लिए भी चिंता का सबब बन सकती है। ऐसे में बीजेपी को इस बात से सावधान रहना होगा कि यदि कांग्रेस एक राज्य में क्षेत्रीय दल का दबदबा खत्म कर सकती है तो लोकसभा चुनाव में क्षेत्रीय दल से हाथ मिला ले तो बीजेपी के लिए स्थिति चुनौती पूर्ण बन सकती है। हालांकि, इसका दूसरा पहलू भी है कि कांग्रेस 1967 से तमिलनाडु, यूपी में 1989, बिहार में 1990 और ओडिशा में 2000 के बाद से सत्ता में नहीं आई है। लेकिन एक बात जो कांग्रेस के पक्ष में है वो तमिलनाडु, यूपी और बिहार में क्षेत्रीय दल कांग्रेस के साथ इंडिया गठबंधन में हैं।

लोकसभा की कुल सीटों में से 200 सीटें ऐसी हैं जहां कांग्रेस भाजपा की मुख्य प्रतिद्वंद्वी बनी हुई है। ऐसे में, अगर अन्य सभी विपक्षी दल कांग्रेस को अपना योगदान देने के लिए तैयार हो जाते हैं तो इस लड़ाई में कांग्रेस अधिक घातक बन सकती है। ऐसे में बीजेपी को अपनी रणनीति को अधिक मजबूत बनाना होगा। इसके लिए अहम है कि इंडिया गठबंधन में सीटों को लेकर सहमति बने। हालांकि, 5 राज्यों में कांग्रेस को मिली हार ने कांग्रेस पर क्षेत्रीय दलों को दबाव बनाने का मौका दे दिया है। अगर देखें तो क्षेत्रीय दल-पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा और ओडिशा में बीजेडी बीजेपी के विजय रथ को रोकने में कामयाब रहे हैं। ऐसे में लोकसभा चुनाव में बीजेपी की राह आसान नहीं होने जा रही है।

 

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