महाराष्ट्र और झारखंड में चुनावी तारीखों का ऐलान,यूपी के 9 विधानसभा सीटों पर होगा 13 नवंबर को इलेक्शन, नतीजे 23 नवंबर को,मिल्कीपुर में चुनाव टला
चुनाव आयोग की तरफ से जारी कार्यक्रम के अनुसार 18 अक्टूबर को अधिसूचना के साथ ही नामांकन शुरू हो जाएंगे। 25 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल किया जा सकेगा। 28 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 30 अक्टूबर तक नाम वापस लिये जा सकेंगे।
ओजस्वी किरण डेक्स
दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव को एक चरण और झारखंड विधानसभा चुनाव 2 चरणों में आयोजित किया जाएगा। झारखंड में पहले चरण का मतदान 13 नवंबर और दूसरे चरण के मतदान की प्रक्रिया 20 नवंबर को संपन्न कराई जाएगी। वहीं महाराष्ट्र में 20 नवंबर को मतदान की प्रक्रिया आयोजित कराई जाएगी। इसके अलावा 23 नवंबर को नतीजों की घोषणा की जाएगी। ऐसे में चुनावी तारीखों के ऐलान के बाद दोनों राज्यों में आदर्श आचार संहिता लागू कर दी गई है।
वायनाड में इस दिन होगा चुनाव
निर्वाचन आयोग के चीफ राजीव कुमार ने ऐलान किया है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में एक लाख से ज्यादा पोलिंग बूथ और झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए 29 हजार से ज्यादा पोलिंग बूथ बनाए जाएंगे। चुनाव आयोग के मुताबिक महाराष्ट्र में 9 करोड़ 63 लाख वोटर और झारखंड में 2.6 करोड़ वोटर हैं। वहीं लोकसभा चुनाव के बाद खाली हुई वायनाड सीट पर भी 13 नवंबर को उपचुनाव आयोजित किया जाएगा। आपको बता दें वायनाड और रायबरेली सीट पर राहुल गांधी ने चुनाव जीता था। लेकिन चुनाव नतीजे के बाद उन्होंने वाडनाड सीट को छोड़ दिया था।
यूपी में 13 नवंबर को होगा उपचुनाव
यूपी में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल कहे जा रहे उपचुनावों का सेट तैयार हो गया है। सभी सीटों पर एक साथ 13 नवंबर को वोटिंग होगी और 23 नवंबर को मतगणना के साथ नतीजे घोषित हो जाएंगे। चुनाव आयोग ने मंगलवार को यूपी की दस विधानसभा सीटों में से नौ सीटों पर उपचुनाव का ऐलान कर दिया।
अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर फिलहाल उपचुनाव नहीं होगा। इसके पीछे कुछ त्योहारों और मेलों को कारण बताया गया है। जिन सीटों पर वोटिंग होगी उनमें मैनपुरी की करहल, अलीगढ़ की खैर, बिजनौर की मीरापुर, प्रयागराज की फूलपुर, गाजियाबाद की गाजियाबाद, मिर्जापुर की मझवां, अम्बेडकरनगर की कटेहरी, संभल की कुंदरकी और कानपुर की सीसामऊ सीट है।
यूपी की इन सीटों पर होना है उपचुनाव
कुंदरकी विधानसभा सीट : संभल लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2024 में पहले शफीकुर रहमान बर्क को उम्मीदवार घोषित किया था। लोकसभा चुनाव से पहले शफीकुर रहमान बर्क का निधन हो गया। इसके बाद अखिलेश यादव ने यहां से उनके पोते और मुरादाबाद की कुंदरकी विधानसभा सीट से विधायक जियाउर रहमान बर्क को चुनावी मैदान में उतारा। जियाउर रहमान संभल सीट से जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। इसके बाद कुंदरकी विधानसभा सीट खाली हुई है। कुंदरकी विधानसभा सीट को समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जा रहा है।
सीसामऊ विधानसभा सीट : कानपुर के सीसामऊ विधानसभा सीट से यूपी चुनाव 2022 के दौरान समाजवादी पार्टी उम्मीदवार इरफान सोलंकी ने जीत दर्ज की थी। इरफान सोलंकी इसके बाद से लगातार कानूनी पचरा में फंसे रहे। एक महिला के घर जलाने के मामले में इरफान सोलंकी को कोर्ट ने 7 साल की जेल की सजा सुनाई। इसके बाद जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता चली गई। कानपुर की सीसामऊ विधानसभा सीट खाली हो गई। सपा ने यहां से इरफान सोलंकी की पत्नी नसीम सोलंकी को चुनावी मैदान में उतार दिया है।
कटेहरी विधानसभा सीट : कटेहरी विधानसभा सीट समाजवादी पार्टी के लालजी वर्मा विधायक थे। समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2024 में लालजी वर्मा को अंबेडकरनगर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। वह जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। इसके बाद कटेहरी विधानसभा सीट खाली हुई है। अंबेडकरनगर जिले की इस सीट पर निषाद पार्टी में भी अपना दावा किया था। हालांकि, भाजपा की ओर से उम्मीदवार उतारे जाने की चर्चा है। समाजवादी पार्टी ने यहां से शोभावती वर्मा को चुनावी मैदान में उतार दिया है।
खैर विधानसभा सीट : अलीगढ़ की खैर विधानसभा सीट को भारतीय जनता पार्टी के गढ़ के रूप में माना जाता है। यहां से यूपी चुनाव 2022 में अनूप बाल्मीकि ने भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी। भाजपा ने उन्हें लोकसभा चुनाव 2024 में हाथरस सीट से उम्मीदवार बनाया। अनूप बाल्मीकि जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। इसके बाद खैर विधानसभा सीट खाली हुई है। समाजवादी पार्टी की कोशिश इस सीट पर जीत दर्ज कर भाजपा के किले में सेंधमारी की है।
करहल विधानसभा सीट : मैनपुरी जिले के तहत करहल विधानसभा सीट आती है। यहां से अखिलेश यादव यूपी चुनाव 2022 में जीत दर्ज कर पहली बार विधायक बने थे। 2012 में मुख्यमंत्री बनने के दौरान अखिलेश यादव विधान परिषद सदस्य चुने गए थे। लोकसभा चुनाव 2024 में कन्नौज लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरकर अखिलेश ने जीत दर्ज की। इसके बाद यह सीट खाली हुई है। समाजवादी पार्टी ने यहां से अखिलेश के भतीजे तेज प्रताप सिंह यादव को चुनावी मैदान में उतारा है।
मझवां विधानसभा सीट : मिर्जापुर की मझवां विधानसभा सीट को लेकर यूपी की राजनीति में खासी चर्चा है। यह सीट यूपी चुनाव 2022 के दौरान एनडीए में गठबंधन के तहत निषाद पार्टी के पाले में गई थी। निषाद पार्टी के टिकट पर उम्मीदवार मनोज कुमार बिंद ने यहां से जीत दर्ज की थी। मनोज कुमार बिंद को भारतीय जनता पार्टी ने भदोही से लोकसभा चुनाव का उम्मीदवार बनाया। लोकसभा चुनाव 2024 में वह जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। अखिलेश यादव ने पीडीए के तहत मझवां से ज्योति बिंद को चुनावी मैदान में उतार दिया है।
फूलपुर विधानसभा सीट : यूपी चुनाव 2022 के दौरान प्रयागराज की फूलपुर विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार प्रवीण पटेल ने जीत दर्ज की थी। भारतीय जनता पार्टी ने प्रवीण पटेल को फूलपुर लोकसभा सीट से लोकसभा चुनाव 2024 में उम्मीदवार बनाया। वह जीत दर्ज करने में कामयाब हुए। इसके बाद यह सीट खाली हुई है। समाजवादी पार्टी ने यहां से मुस्तफा सिद्दीकी को उम्मीदवार घोषित कर दिया है।
मीरापुर विधानसभा सीट : मुजफ्फरनगर की मीरापुर विधानसभा सीट पर यूपी चुनाव 2022 के दौरान राष्ट्रीय लोक दल के उम्मीदवार चंदन चौहान ने जीत दर्ज की थी। उस समय राष्ट्रीय लोकदल समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनावी मैदान में उतरी थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोक दल ने एनडीए का दामन थामा। जयंत चौधरी ने चंदन चौहान को बिजनौर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया और वह जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। इसके बाद मीरापुर विधानसभा सीट खाली हो गई।
गाजियाबाद सदर सीट : गाजियाबाद सदर विधानसभा सीट भी भारतीय जनता पार्टी के मजबूत किले के रूप में जानी जाती है। यूपी चुनाव 2022 के दौरान यहां से अतुल गर्ग ने जीत दर्ज की थी। लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा ने गाजियाबाद के सांसद रहे पूर्व सेना प्रमुख रिटायर्ड जनरल वीके सिंह का टिकट काटकर अतुल गर्ग को चुनावी मैदान में उतारा। अतुल गर्ग जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। इसके बाद यह सीट खाली हुई है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उपचुनाव में एक मौका है बीजेपी के पास माहौल बनाने का
लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के इंडिया गठबंधन से हारने के बाद भाजपा के पास 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले माहौल बनाने का उपचुनाव एक मौका है। भाजपा ने इसके लिए तैयारियां भी काफी समय पहले से शुरू कर दी हैं। सभी सीटों पर तीन-तीन मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद लोकसभा चुनाव के बाद सभी दस सीटों पर दौरे कर चुके हैं।
सपा ने दस में से छह सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है। पहली बार उपचुनाव के मैदान में आ रही बसपा भी मिल्कीपुर समेत दस में से पांच सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। भाजपा के प्रत्याशियों का ऐलान भी एक दो दिन में होने की संभावना है। भाजपा दस में से नौ सीटों पर खुद उतरने की तैयारी में है। एक सीट मीरापुर जयंत चौधरी की पार्टी रालोद को दी जा सकती है।
लोकसभा चुनाव में बीजेपी को सबसे ज्यादा नुकसान यूपी में ही हुआ था। भाजपा यूपी की 80 में से पिछली बार 62 सीटें जीती थी। इस बार उसे 33 पर ही जीत मिली। सहयोगी रालोद ने दो और अपना दल ने एक सीट जीती। इससे एनडीए 36 सीटें जीत सका। सपा अकेले इससे ज्यादा 37 सीटें जीत गई। कांग्रेस को छह सीटों पर जीती मिली थी।

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