पापड़ और कचरी की खुशबू से महका बाजार, घर जैसा स्वाद लुभा रहा ग्राहकों का मन
ओजस्वी किरण ब्यूरों
रंगों का त्योहार होली अब बस कुछ ही दिन दूर है और संगमनगरी की फिजाओं में इसकी खुमारी साफ दिखने लगी है। बाजार अब न सिर्फ रंगों और पिचकारियों से सजे हैं, बल्कि पापड़-कचरी की सोंधी महक ने खरीदारी का उत्साह दोगुना कर दिया है। इस बार बाजार में खास बदलाव देखने को मिल रहा है, लोग मशीनी उत्पादों के बजाय होममेड पापड़ व व्रत वाले चिप्स पर फिदा हैं।
लोकनाथ हो या फिर कटरा, तेलियरगंज हो या फिर राजरूपपुर… इन सभी बाजारों में इस बार आलू के पापड़ की मांग सबसे अधिक है। खासतौर पर महिलाओं द्वारा घर में तैयार किए गए पारंपरिक आलू के पापड़ों की खूब बिक्री हो रही है। सिविल लाइंस, चौक, रामभवन, मुट्ठीगंज, अल्लापुर, मुंडेरा, धूमनगंज और कटरा जैसे प्रमुख बाजारों में दुकानों पर घरेलू महिलाओं द्वारा सप्लाई किए गए पापड़ हाथों-हाथ बिक रहे हैं। ग्राहकों का कहना है कि घर के बने पापड़ों में जो शुद्धता और मसालों का संतुलन होता है, वह पैकेट बंद सामान में नहीं मिलता।
चिप्स, साबूदाना और चावल के पापड़ की भी मांग
सिर्फ आलू ही नहीं, साबूदाना और चावल के पापड़ की भी बाजार में खूब डिमांड है। रंग-बिरंगी कचरी और डिजाइनदार चावल के पापड़ चच्चों की पहली पसंद बने हुए हैं। दुकानदारों के मुताबिक, पिछले साल की तुलना मैं इस बार आलू चिप्स और साबूदाना पापड़ की बिक्री में करीब 20-25 प्रतिशत का उछाल देखा जा रहा है। दुकानदारों के अनुसार आलू के चिप्स की भी किस्में अधिक हैं। चिप्स की शुरुआती कीमत 250 से 500 रुपये किलो तक है। वहीं बच्चों के बीच रंग-बिरंगी कचरी की भारी डिमांड है। मूंग और उड़द के खास मसालेदार पापड़ बनारस और जबलपुर से भी मंगवाए गए हैं।

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