युवा मंच महा-आंदोलन: पुरानी नियमावली की मांग, खून से लिखेंगे पत्र
ओजस्वी किरण संवाददाता, प्रयागराज।
युवा मंच महा-आंदोलन के बैनर तले प्रयागराज एक बार फिर सुलग उठा है। अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में रिक्त 23,775 पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर प्रतियोगी छात्र अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।
भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच पिछले कई दिनों से आंदोलनरत प्रतियोगी छात्रों ने अब स्पष्ट कर दिया है कि वे पीछे नहीं हटेंगे।
युवा मंच का महा-आंदोलन क्यों हो रहा है?
’युवा मंच’ के बैनर तले एकजुट हुए हजारों युवाओं ने घोषणा की है कि यदि सरकार अब भी कुंभकर्णी नींद में सोती रही, तो वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने खून से पत्र लिखकर अपने हक की गुहार लगाएंगे।
आंदोलन की धार को तेज करते हुए युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह ने प्रशासन और शासन को सीधी चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नई नियमावली के नाम पर लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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प्राविधिक कला, हिंदी (संस्कृत की अनिवार्यता), अंग्रेजी, संगीत और कंप्यूटर शिक्षकों के पदों को लेकर किए गए बदलाव लाखों युवाओं को बेरोजगारी की चौखट पर धकेल रहे हैं। यह सिर्फ नियमावली का बदलाव नहीं, बल्कि पांच लाख से अधिक युवाओं के करियर को रौंदने की साजिश है।
युवा मंच के मंच से एक स्वर में कहा गया कि आखिर सरकार युवाओं को दर-दर की ठोकरें खाने के लिए क्यों मजबूर कर रही है? प्रवक्ता पदों से गैर-बीएड अभ्यर्थियों को बाहर करना और कंप्यूटर शिक्षकों के पदों को भर्ती प्रक्रिया से ही गायब कर देना, यह दर्शाता है कि शिक्षा विभाग में किस कदर लापरवाही और मनमानी हावी है।
अनिल सिंह ने तल्ख लहजे में कहा कि जब लाखों पद रिक्त पड़े हैं, तो विज्ञापन जारी करने में यह ‘अड़ंगेबाजी’ क्यों? क्या युवाओं का भविष्य फाइलों के बोझ तले दबाकर रखा जाएगा?
आंदोलन स्थल पर एल.के. चौधरी, पी.एन. वर्मा, आलोक दूबे, अखिलेश वर्मा, सुशोभित चौरसिया और रिंकी चौहान सहित अन्य छात्र नेताओं ने दहाड़ते हुए कहा कि अब शांतिपूर्ण प्रदर्शन का दौर बीत चुका है। यदि सरकार ने समय रहते पुरानी नियमावली के अनुसार विज्ञापन जारी नहीं किया, तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी और उग्र रूप धारण करेगा।
शिक्षक भर्ती से जुड़ी अधिक जानकारी और अपडेट के लिए https://upsessb.pariksha.nic.in/ बोर्ड कि आधिकारिक वेबसाइट पर देखें।
आंदोलन स्थल पर उपस्थिति महिलाओं और पुरुष अभ्यर्थियों का जोश यह बता रहा है कि वे अब बिना अधिकार लिए पीछे हटने वाले नहीं हैं।
युवा मंच के माध्यम से यह सवाल पूरे प्रदेश का है—कि क्या शिक्षा के मंदिर में नियुक्ति प्रक्रिया को ‘जटिलता’ के जाल में फंसाकर युवाओं का हक मारा जा रहा है? सरकार के दावे और धरातल की हकीकत के बीच इस बढ़ते असंतोष को समय रहते न समझा गया, तो इसके परिणाम घातक हो सकते हैं।
युवा अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि तत्काल विज्ञापन और न्याय मांग रहे हैं। देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के नाम लिखा जाने वाला यह ‘खून से सना पत्र’ सरकार के बंद दरवाजों को खोलने में कामयाब होता है या फिर युवाओं का यह आक्रोश और भी तीव्र होगा।

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