न्यायिक नियुक्तियों का मामला सुप्रीम कोर्ट की कॉज लिस्ट से हटा दिया गया। जस्टिस संजय किशन कौल का कहना है कि उन्होंने न तो केस डिलीट किया और न ही इसे सुनने को तैयार थे।
नई दिल्ली: केंद्र की तरफ से न्यायिक नियुक्तियों में देरी से जुड़े मामले को कॉज लिस्ट से हटा दिया गया। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को यह असामान्य घटनाक्रम हुआ। इसे ‘बहुत अजीब’ बताते हुए याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने मामले को हटाने में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री की भूमिका पर सवाल उठाया। भूषण ने पीठ से कहा कि मामले को ‘बिना किसी नोटिस के” हटा दिया गया है।’ जस्टिस संजय किशन कौल की बेंच को मंगलवार को याचिका पर फिर से सुनवाई करनी थी। जस्टिस कौल ने मौखिक रूप से कहा कि उन्होंने न तो मामले को हटाया और न ही मामले की सुनवाई से इनकार किया। जस्टिस कौल ने कहा, ‘
मुझे यकीन है कि सीजेआई को इसकी (मामले को हटाने की) जानकारी है।‘ उन्होंने कहा, ‘कुछ चीजों को अनकहा छोड़ देना ही बेहतर है।‘ पिछली सुनवाई में, बेंच ने सुप्रीम कोर्ट कॉलिजियम की तरफ से भेजी गई हाई कोर्ट जजों के ट्रांसफर और अपॉइंटमेंट की सिफारिशों में केंद्र की ‘पिक एंड चूज’ नीति को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से कहा था कि जजों के ‘सिलेक्टिव’ ट्रांसफर से ‘अच्छा संकेत नहीं जाता।’
याचिकाकर्ता के एक वकील ने कहा कि मामले को सुनवाई के लिए नहीं रखा गया और डिलीट किया गया है। तब जस्टिस कौल ने कहा कि हमने सुनवाई से मामले को डिलीट नहीं किया है। बाद में दूसरे याचिकाकर्ता की ओर से पेश एडवोकेट प्रशांत भूषण ने मामला उठाया और कहा कि यह हैरानी की बात है कि मामले को सुनवाई के लिए रखा गया था और इस बारे में 20 नवंबर को कोर्ट का ऑर्डर था, लेकिन मामला डिलीट हो गया।
जस्टिस कौल ने कहा कि एक अन्य याची के वकील ने यह मुद्दा उठाया था और हम कह चुके हैं कि हमने डिलीट नहीं किया है। जब प्रशांत भूषण ने कहा कि इस मामले में बेंच को रजिस्ट्री से स्पष्टीकरण मांगना चाहिए, तब जस्टिस कौल ने कहा कि मुझे लगता है कि चीफ जस्टिस इस बात से वाकिफ होंगे। भूषण ने कहा कि यह अप्रत्याशित है कि ज्यूडिशियल ऑर्डर के बाद भी मामले को लिस्ट नहीं किया गया और वह डिलीट हो गया। प्रशांत भूषण ने यह भी कहा कि यह मामला काफी समय से जस्टिस कौल की बेंच द्वारा सुना जा रहा है।
20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एसके कौल की अगुवाई वाली बेंच ने हाई कोर्ट के जजों के ट्रांसफर के मुद्दे पर केंद्र द्वारा पिक एंड चूज पर ऐतराज जताया था और कहा था कि यह अच्छा संकेत नहीं है। कॉलिजियम ने ट्रांसफर के लिए 11 नाम भेजे थे। शीर्ष अदालत ने कहा था कि छह नाम अभी तक पेंडिंग है और पांच का ट्रांसफर किया गया। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर को कहा था कि सरकार के पिक एंड चूज नीति के कारण सीनियरिटी प्रभावित हुआ है। इस तरह का प्रैक्टिस बंद होना चाहिए।
याची के वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई कि वह केंद्र सरकार के अधिकारी को समन कर पूछे कि क्यों आदेश का पालन नहीं हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट असोसिएशन बेंगलुरु की ओर से अर्जी दाखिल कर केंद्र सरकार के लॉ मिनिस्ट्री को प्रतिवादी बनाया गया है और कंटेप्ट अर्जी दाखिल की गई है। अर्जी में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में कॉलिजियम सिफारिश को क्लियर करने के लिए टाइम लाइन तय किया था, लेकिन उसका पालन नहीं हो रहा है।

+ There are no comments
Add yours