किन्नर अखाड़ा ने किया चीनी रंग और पिचकारियों के बहिष्कार का ऐलान”
ओजस्वी किरण ब्यूरो
प्रयागराज। देशभर में होली के त्यौहार की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं। इसी बीच संगम नगरी प्रयागराज से स्वदेशी का बड़ा संदेश सामने आया है। किन्नर अखाड़ा ने इस वर्ष होली के दौरान चीन में निर्मित रंगों, पिचकारियों और अन्य सजावटी सामानों के बहिष्कार का निर्णय
किन्नर अखाड़ा की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी कल्याणी नंद गिरि (छोटी मां) महाराज ने चीन में बने रंग, पिचकारी और सजावटी सामानों के बहिष्कार की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि विदेशी, खासकर चीन में बने उत्पादों की बिक्री से वह देश आर्थिक रूप से मजबूत होता है, जिससे भारत को आर्थिक और सामरिक नुकसान हो सकता है।
महामंडलेश्वर ने कहा कि इस वर्ष बड़ी संख्या में किन्नर संत और शिष्य प्राकृतिक रंगों से होली मनाएंगे। किसी भी किन्नर संत या शिष्य द्वारा चीन में बने रंग, पिचकारी या अन्य सामग्री की खरीद नहीं की जाएगी। उनका कहना है कि प्राकृतिक रंगों से न केवल पर्यावरण की रक्षा होती है, बल्कि त्वचा और स्वास्थ्य पर भी कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। इसके विपरीत, बाजार में उपलब्ध कई विदेशी रंगों में रासायनिक तत्वों का अधिक उपयोग होता है, जो त्वचा और आंखों के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं।
स्वामी कल्याणी नंद गिरि ने लोगों से अपील की कि वे देश में बने उत्पादों का उपयोग करें। इससे स्थानीय कारीगरों और छोटे व्यापारियों को रोजगार मिलेगा और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि स्वदेशी वस्तुओं की खरीद ही सच्चे अर्थों में देशभक्ति का परिचायक है।
उन्होंने आगे कहा कि त्योहारों के माध्यम से भी स्वदेशी को बढ़ावा दिया जा सकता है। यदि हर व्यक्ति संकल्प ले कि वह विदेशी सामान की जगह देशी उत्पाद खरीदेगा, तो इसका
सकारात्मक असर सीधे स्थानीय उद्योग और रोजगार पर पड़ेगा।
इस अवसर पर किन्नर अखाड़ा के श्रीमहंत कामाक्षीनंद गिरि, शुभमनंद गिरि, हर्षिता नंद गिरि, मनीषा नंद गिरि, शिवानी नंद गिरि, आलियानंद गिरि सहित बड़ी संख्या में शिष्यगण उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में प्राकृतिक रंगों से होली मनाने और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।

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