अक्षय वट की छाँव में उमड़ा भक्ति का सैलाब; मुनि समता सागर महाराज का भव्य मंगल प्रवेश
ओजस्वी किरण ब्यूरों
प्रयागराज। संगम नगरी में आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब झारखंड के सम्मेद शिखर से पदविहार करते हुए निर्यापक मुनि समता सागर महाराज अपने संघ के साथ तीर्थंकर ऋषभदेव की तपस्थली (अंदावा) और फिर ऐतिहासिक अक्षय वट पहुँचे।
युग के आदि पुरुष की साधना को नमन
मुनि संघ ने अकबर किले में स्थित उस प्राचीन अक्षय वट की वंदना की, जहाँ जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव ने एक हजार वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। मुनि श्री के साथ मुनि श्री पवित्र सागर, वासुपूज्य सागर सहित अन्य मुनिराजों की उपस्थिति ने वातावरण को वैराग्यमय बना दिया। इस अवसर पर मुनि श्री ने कहा कि “अक्षय वट आत्म-साक्षात्कार का प्रतीक है, जहाँ से भगवान आदिनाथ ने संसार को अहिंसा और संयम का मार्ग दिखाया।”
जीरो रोड पर भव्य अगवानी
अक्षय वट के दर्शन के पश्चात मुनि संघ का जीरो रोड स्थित जैन मंदिर में मंगल प्रवेश हुआ। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा और आरती के साथ गुरुवर का स्वागत किया। वरिष्ठ जनों ने भक्तिभाव से मुनि संघ के पाद प्रक्षालन किए।
आज होगा आर्यिका संघ का आगमन
धर्म की इस गंगा को आगे बढ़ाते हुए, सोमवार को जीरो रोड जैन मंदिर में आर्यिका साध्वियों का मंगल प्रवेश होगा। स्थानीय जैन समाज इस विशेष अवसर के लिए भव्य तैयारियों में जुटा है, जिससे संपूर्ण प्रयागराज में आध्यात्मिक हर्षोल्लास का वातावरण बना हुआ है।

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