अलविदा नमाज के चलते शंकराचार्य मामले की सुनवाई टली,खुद के जाल में फंस रहे आशुतोष ब्रह्मचारी- पी एन मिश्र
अब 17 अप्रैल को होगी सुनवाई
ओजस्वी किरण ब्यूरो
प्रयागराज। ज्योतिष्ठ पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के मामले में जिला न्यायालय में शुक्रवार को सुनवाई होनी थी जो नहीं हुई। मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 17 अप्रैल तय कर दी गई है। शुक्रवार को अलविदा नमाज होने के कारण अधिवक्ता हड़ताल पर रहे। ऐसे में शंकराचार्य मामले में सुनवाई को अगली तिथि के लिए टाल दिया गया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज दो मामलों में सुनवाई के लिए 13 मार्च की तारीख मुकर्रर की गई थी।
पहला मामला पॉक्सो एक्ट से संबंधित है जिसमें अदालत ने दोनों पक्षों को लिखित बयान मांगा है। वहीं दूसरा मामला शंकराचार्य का वीजा पासपोर्ट जब्त करने की मांग को लेकर है ताकि वह विदेश न भाग सकें। दोनों मामले में शुक्रवार को सुनवाई होनी थी। शंकराचार्य के अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी ने बताया कि मामले की सुनवाई 17 अप्रैल को निर्धारित की गई है। आज कोई बयान दर्ज नहीं हो सका है।
जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के अधिवक्ता डॉ. पीएन मिश्रा ने कहा कि शंकराचार्य और उनके शिष्य पर मुकदमा दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी अपने ही बुने जाल में फंसते जा रहे हैं। वह सफेद झूठ का पुलिंदा न्यायालय के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं। कहा कि शंकराचार्य की ओर से इनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने के लिए जल्द ही न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा। जिला न्यायालय में सुनवाई के सिलसिले में स्वामी मुकुंदानंद गिरि के साथ प्रयागराज पहुंचे डॉ. मिश्र ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आशुतोष ब्रह्मचारी ने कोर्ट में शपथ पत्र देकर शंकराचार्य और उनके शिष्य मुकंदानंद का पासपोर्ट जब्द करने की गुहार लगाई है, ताकि वह विदेश न भाग सकें।
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. मिश्र ने कहा कि पहली बात कि शंकराचार्य और उनके शिष्य मुकुंदानंद के पास कोई पासपोर्ट नहीं है। दूसरी बात धर्मशास्त्रों में धर्माधीश या शंकराचार्य को देश की सीमा के बाहर जाने पर निषिद्ध किया गया है। वह धर्म प्रचार के लिए विदेश नहीं जा सकते हैं, क्योंकि वह समुद्र को नहीं लांघ सकते हैं। अगर जाते हैं तो पतित घोषित हो जाएंगे। 1940 में विदेश यात्रा करने पर पुरी के शंकराचार्य को पतित घोषित किया जा चुका है। भारत का अंग होने के बावजूद शंकराचार्य पाकिस्तान तक नहीं जा सकते हैं क्योंकि वहां विधर्मियों का शासन है।

+ There are no comments
Add yours