ज्योतिष : आस्था, चेतना और विवेक का संतुलन

1 min read

ज्योतिष : आस्था, चेतना और विवेक का संतुलन

आम जन के लिए क्या जानना ज़रूरी है?

आज के तेज़ रफ्तार, तनावपूर्ण और अनिश्चित समय में ज्योतिष को लेकर आम लोगों के मन में जिज्ञासा भी है और भ्रम भी। कोई इसे जीवन का मार्गदर्शक मानता है, तो कोई अंधविश्वास कहकर खारिज कर देता है। ऐसे में सवाल उठता है—आम जनता को ज्योतिष के बारे में वास्तव में क्या जानना चाहिए?

इन्हीं प्रश्नों के उत्तर तलाशने के लिए ओजस्वी किरण पत्रिका की सहायक संपादक इलाक्षी शुक्ला ने देश के प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य राम सियासन से विस्तृत बातचीत की। प्रस्तुत है प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य से विशेष बातचीत का अंश।

प्रश्न: आज के समय में ज्योतिष को लेकर आम जनता के मन में सबसे बड़ा भ्रम क्या है।

उत्तर (राम सियासन): सबसे बड़ा भ्रम यह है कि ज्योतिष को लोग भाग्य बदलने का साधन समझ लेते हैं। जबकि ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता, वह केवल समय और प्रवृत्ति का संकेत देता है। जीवन में कर्म, पुरुषार्थ और विवेक सबसे महत्वपूर्ण हैं।

प्रश्न: क्या ज्योतिष को विज्ञान के विरोध में देखा जाना चाहिए।

उत्तर: नहीं। विज्ञान और ज्योतिष के क्षेत्र अलग हैं। विज्ञान कारण और उपचार बताता है, जबकि ज्योतिष काल और चेतावनी का कार्य करता है। दोनों का टकराव नहीं, बल्कि संतुलन होना चाहिए। चिकित्सा, शिक्षा या कानून के निर्णय विज्ञान से ही लेने चाहिए।

प्रश्न: आम लोग ज्योतिष से जुड़ी सबसे बड़ी गलती कौन-सी करते हैं।

उत्तर : लोग हर निर्णय—शादी, नौकरी, बीमारी—सब कुछ कुंडली पर छोड़ देते हैं। यह गलत है। ज्योतिष मार्गदर्शन है, निर्णय नहीं। निर्णय लेने की जिम्मेदारी व्यक्ति की ही होती है।

प्रश्न: आजकल डर दिखाकर उपाय बेचने का चलन बढ़ा है, आप इसे कैसे देखते हैं।

उत्तर: यह ज्योतिष का सबसे बड़ा दुरुपयोग है। जो ज्योतिषी भय पैदा करता है—“भारी दोष है, सब नष्ट हो जाएगा”—वह ज्योतिषी नहीं, व्यापारी है। सच्चा ज्योतिष आशा, धैर्य और विवेक देता है, डर नहीं।

प्रश्न: स्वास्थ्य और बीमारी में ज्योतिष की क्या भूमिका हो सकती है।

उत्तर: ज्योतिष बीमारी का इलाज नहीं करता। वह केवल यह संकेत दे सकता है कि व्यक्ति को स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहना चाहिए। इलाज हमेशा डॉक्टर से ही होना चाहिए। ज्योतिष को चिकित्सा का विकल्प बनाना खतरनाक है।

प्रश्न: युवा पीढ़ी ज्योतिष को या तो अंधविश्वास मानती है या पूरी तरह खारिज कर देती है,आप क्या कहेंगे।

उत्तर: युवाओं को संतुलन सीखना चाहिए। ज्योतिष को न तो अंधविश्वास बनाएं, न ही पूरी तरह नकारें। इसे self-awareness tool की तरह लें—स्वभाव, धैर्य और समय-प्रबंधन समझने के लिए।

प्रश्न: क्या कुंडली से भविष्य पूरी तरह बताया जा सकता है।
उत्तर : नहीं। कुंडली संभावनाएं बताती है, निश्चित भविष्य नहीं। भविष्य तीन चीज़ों से बनता है—कर्म, समय और विवेक। कुंडली इनमें से केवल समय का संकेत देती है।

प्रश्न: समाज में ज्योतिष की सकारात्मक भूमिका क्या रही है।
उत्तर: ज्योतिष भारतीय संस्कृति की समय-चेतना है—पंचांग, पर्व-त्योहार, मुहूर्त, कृषि-काल निर्धारण। यह समाज को अनुशासन और धैर्य सिखाता है, यदि सही ढंग से अपनाया जाए।

प्रश्न: आम पाठकों के लिए आप ज्योतिष को लेकर क्या सावधानियाँ सुझाएंगे।

उत्तर : ज्योतिष को सलाह समझें, आदेश नहीं,भय दिखाने वालों से दूर रहें महंगे और दिखावटी उपायों से बचें, स्वास्थ्य, निवेश, कानून में विशेषज्ञ की राय लें,कर्म और नैतिकता को सर्वोपरि रखें।

प्रश्न: अंत में, ज्योतिष को एक पंक्ति में कैसे परिभाषित करेंगे।

उत्तर : “ज्योतिष दीपक है—रास्ता दिखाता है, चलना व्यक्ति को स्वयं होता है।”

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours