9 वर्षीय बालक को मिली नई जिंदगी, एसआरएन अस्पताल में दुर्लभ सर्जरी सफल
इलाक्षी शुक्ला उप-संपादक
एसआरएन अस्पताल चिकित्सकों ने एक दुर्लभ और जटिल सर्जरी कर 9 वर्षीय बालक को नई जिंदगी दी है। बालक पिछले एक वर्ष से चेहरे के बाएं हिस्से में सूजन और दर्द से पीड़ित था।
25 दिसंबर 2025 को उसे कैंसर सर्जरी विभाग में भर्ती कराया गया, जहां जांच में बाएं जबड़े (मैंडिबल) में एमेलोब्लास्टोमा नामक दुर्लभ ट्यूमर की पुष्टि हुई। यह बीमारी बच्चों में अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है।
29 दिसंबर को प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष एवं उप-प्राचार्य (वाइस प्रिंसिपल) डॉ मोहित जैन और कैंसर सर्जन डॉ.राजुल अभिषेक के नेतृत्व में लगभग आठ घंटे तक चली सर्जरी में बाएं जबड़े को निकालकर पैर की हड्डी (फिबुला) से जबड़े का सफल पुनर्निर्माण किया गया।
डॉ. राजुल अभिषेक ने बताया, “यह सर्जरी बच्चों में विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण होती है। हमारा उद्देश्य केवल ट्यूमर को पूरी तरह निकालना ही नहीं, बल्कि बच्चे के चेहरे की बनावट, चबाने और बोलने की क्षमता को भी सुरक्षित रखना था।”*
माइक्रोवैस्कुलर तकनीक से की गई इस सर्जरी के बाद आयुष तेजी से स्वस्थ हुआ और 6 जनवरी 2026 को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अस्पताल प्रशासन ने सर्जिकल, एनेस्थीसिया, नर्सिंग एवं पुनर्वास टीम के समन्वित प्रयासों की सराहना की।
क्या होता है एमेलोब्लास्टोमा?
एमेलोब्लास्टोमा जबड़े की हड्डी में होने वाला एक दुर्लभ ट्यूमर है,जो अधिकतर निचले जबड़े को प्रभावित करता है। यह धीरे-धीरे बढ़ता है, लेकिन समय पर इलाज न हो तो चेहरे की बनावट बिगाड़ सकता है और चबाने-बोलने में दिक्कत पैदा कर सकता है।
मुख्य लक्षण:
• चेहरे या जबड़े में सूजन
• लंबे समय तक बना रहने वाला दर्द
• चेहरे की असमानता
इलाज
• सर्जरी मुख्य उपचार
• जरूरत पड़ने पर जबड़े का पुनर्निर्माण
डॉ.राजुल अभिषेक ने सलाह देते हुए कहाकि चेहरे या शरीर के किसी भी हिस्से में बनी रहने वाली गांठ या सूजन की अनदेखी न करें, समय रहते जांच कराना बेहद जरूरी है।

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