राष्ट्रपति के अभिभाषण में व्यवधान लोकतंत्र का अपमान : पंकज चौधरी
कांग्रेस व इंडी गठबंध ने संसद की गरिमा को पहुंचाई ठेस, कांग्रेस एवं इंडी गठबंधन ने संसदीय मर्यादा भंग की
ओजस्वी किरण ब्यूरों
लखनऊ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 28 जनवरी, 2026 को संसद के बजट सत्र के प्रथम दिवस पर लोकसभा एवं राज्यसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित किया। इस दौरान कांग्रेस और इंडी गठबंधन द्वारा हंगामा किया, अराजकता एवं संसदीय मर्यादा का उल्लंघन किया। वित्त राज्य मंत्री एवं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने विपक्ष के इस व्यवहार की कठोर शब्दों में निंदा की। उन्होंने इस आचरण को न केवल शर्मनाक और निंदनीय, अपितु भारतीय लोकतंत्र की आत्मा पर सीधा प्रहार बताया।
श्री चौधरी ने कहा कि राष्ट्रपति महोदया का अभिभाषण राष्ट्र निर्माण की दिशा में सरकार की नीतियों, प्राथमिकताओं और उपलब्धियों का दर्पण होता है। ऐसे गरिमामय अवसर पर जानबूझकर व्यवधान उत्पन्न करना और हंगामा करना संवैधानिक मर्यादाओं के पूर्णतः विरुद्ध है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हंगामे के दौरान वंदे मातरम, जो बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित है और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों देशभक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा, का अपमान भी किया गया। यह गीत हमारी सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है, जिसे महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों ने आत्मसात किया। कांग्रेस पार्टी का इस तरह का आचरण उसकी राष्ट्रविरोधी मानसिकता को दर्शाता है। यह घटना विपक्ष की राजनीतिक हताशा और राष्ट्रहित से ऊपर व्यक्तिगत एजेंडे को रखने की प्रवृत्ति को उजागर करती है। पंकज चौधरी ने यह भी कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे तथा राहुल गांधी ने इस हंगामे को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया, बल्कि उनके आचरण से स्थिति और अधिक उग्र हुई। संसद लोकतंत्र का मंदिर है, जहां गरिमा, शिष्टाचार और संयम का पालन सर्वोपरि होता है। संविधान के अनुच्छेद 105 के अंतर्गत सांसदों का दायित्व है कि वे अपनी बात बहस और संवाद के माध्यम से रखें, न कि अराजकता के जरिए।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार का व्यवहार न केवल सदन की कार्यवाही को बाधित करता है, अपितु करोड़ों देशवासियों के लोकतंत्र पर विश्वास को भी ठेस पहुंचाता है। श्री चौधरी ने विपक्षी दलों से इस कृत्य के लिए देशवासियों से सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना करने की मांग की। अंत में उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद का सम्मान सुनिश्चित करने की अपील की, ताकि संसद वास्तव में जनता की सच्ची आवाज बन सके।

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