संत रैदास के सपनो का राज्य “बेगमपुरा” की स्थापना आसपा का लक्ष्य
ओजस्वी किरण ब्यूरों
प्रयागराज। भीम आर्मी आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के तत्वावधान में यमुनापार की तहसील बारा के विकास खण्ड जसरा के परिसर में सन्त शिरोमणि गुरु रैदास का जन्म दिवस सादगीपूर्ण ढंग से गौहनिया बाजार होते हुए जसरा बाजार तक शोभा यात्रा निकाल कर और सन्त सम्मलेन आयोजित कर भव्यता के साथ मनाया गया।
सन्त सम्मलेन के आयोजक आसपा के सदस्य समाजसेवी उच्च न्यायालय के अधिवक्ता आईपी रामबृज ने बताया कि संत रैदास जी का सपना था कि “ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिलै सबन को अन्न। छोट-बड़ो सब सम बसै, रैदास रहे प्रसन्न।” संत रैदास ने मध्यकालीन भारत में प्रचलित मनुवादी आडंबरों, कर्मकांडों और जातिगत भेदभाव का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तीर्थ यात्रा, व्रत, गंगा स्नान और मूर्तियों की पूजा के स्थान पर मन की पवित्रता और ईमानदारी से कर्म करने पर जोर दिया। उनका मानना था कि ईश्वर निर्गुण है और प्रेम व भक्ति से ही प्राप्त हो सकता है न कि बाह्य ढोंग से। सन्त रैदास एक आदर्श, समतावादी और कल्याणकारी राज्य (बेगमपुरा) की परिकल्पना करते थे। जहां सामाजिक समरसता, समानता और सर्वसमावेशी समाज हो का संदेश देता है, जहाँ कोई भूखा न सोए और सभी लोग मिल-जुलकर रहें।
उन्होंने कहा कि संत रैदास जी की ‘बेगमपुरा’ की अवधारणा आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की सत्ता आने पर की जाएगी जहां एक ऐसे आदर्श, दुःख-रहित (बिना गम का) नगर या समाज निर्माण होगा जहां ऊँच-नीच, जातिवाद, गरीबी, और कर-मुक्त समाज होगा। शोभा यात्रा और सन्त सम्मलेन में हजारों लोग उपस्थित रहे।

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