संत रविदास जयंती पर मानवता की मिसाल
प्रज्ञा हॉस्पिटल शंकरगढ़ की पहल, मरीजों में बांटे फल व कंबल
ओजस्वी किरण यमुनानगर ब्यूरो
शंकरगढ़,प्रयागराज। यमुनानगर में शंकरगढ़ स्थित प्रज्ञा हॉस्पिटल के डायरेक्टर की मां कुसुम सिंह ने संत शिरोमणि रविदास जयंती के अवसर पर मरीजों में फल और कंबल का वितरण करते हुए उनके जल्द स्वास्थ्य लाभ की कामना की गई। इस अवसर पर कुसुम सिंह ने कहा कि संत रविदास जी ने समाज में व्याप्त जाति के आधार पर शोषण भेदभाव और जन्म आधारित श्रेष्ठता को नकारा था। उनकी शिक्षाएं हमें मानवता की सेवा और सामाजिक समरसता की ओर प्रेरित करती है।संत रविदास जी के वचनों को आत्मसात करते हुए मानव सेवा के उद्देश्य से कार्य करना चाहिए। उनके द्वारा संत रविदास जी के जीवन और शिक्षाओं पर चर्चा की गई, समाज में समरसता और भाईचारे का संदेश दिया गया।

इस अवसर पर अस्पताल के डायरेक्टर डॉक्टर प्रभाकर सिंह ने कहा कि संत रविदास एक महान समाज सुधारक थे। देश में व्याप्त अंधविश्वास, जातिवाद और पाखंड के खिलाफ समाज के निर्माण में अतुलनीय योगदान है। उनका मानना था कि व्यक्ति का आधार एवं सम्मान कर्म के आधार पर करनी चाहिए जन्म के आधार पर कोई पूज्यनीय नहीं होता है। जाति एक ऐसा रोग है जिसने भारतीयों के मनुष्यता को नाश कर दिया है, जाति इंसान को इंसान नहीं रहने देती उसे ऊंच-नीच में बांट देती है। इस मौके पर मौजूद उग्रसेन द्विवेदी ने कहा कि एक आदर्श एवं समता मूलक समाज को महापुरुषों के विचारों को समाज में स्थापित करने से ही होगा। जब तक सभी वर्गों से बिना भेदभाव के भारत के विकास में भागीदारी सुनिश्चित नहीं किया जाएगा तब तक देश का विकास देश की एकता, एकजुटता और अखंडता सुनिश्चित नहीं हो सकती है। कार्यक्रम के दौरान मुख्य रूप से उग्रसेन द्विवेदी, वीरेंद्र प्रजापति, दिवाकर, प्रमोद, शमशाद, रेखा सिंह, प्रियांशु सिंह, संगीता पाल, सुलेखा सिंह एवं अस्पताल के समस्त स्टाफ मौजूद रहे।

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