उत्तर पुस्तिकाएं बच्चों का भविष्य तय नहीं करतीं, परीक्षा एक उत्सव है अस्तित्व की जंग नहीं – डॉ वीके सिंह
अच्छे अंक के दवाब को लेकर मनोचिकित्सक ने अभिभावक एवं बच्चों को दिया सुझाव
ओजस्वी किरण ब्यूरों
प्रयागराज।उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की वर्ष २०२६ की दसवीं एवं बारहवीं की परीक्षाएं बुधवार १८ फरवरी से उत्साहपूर्वक शुरू हो गयी है। परीक्षा शुरू होते ही घरों में पढ़ाई का दबाब और अधिक बढ़ गय है। परीक्षा में अच्छे अंको के लिए छात्रों के साथ-साथ उनके अभिभावकों में भी तनाव एवं बेचैनी देखी जा रह है। परीक्षा के समय छात्रों में तनाव, चिंता एवं दबाब की इस स्थित को देखते हुए मनोचिकित्सकों एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बच्चों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से फिट रहने के लिए महत्वपूर्ण सलाह दी। स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल के मानसिक रोग विभाग के आचार्य एवं विभागाध्यक्ष डा. वीके सिंह ने कहा कि बोर्ड परीक्षा केवल प्रश्न पत्र करने को हल करने की प्रकिया नही बल्कि, परीक्षार्थियों के धैर्य, आत्मविश्वास एवं व्यत्तित्व की भी परीक्षा है। शिक्षा का उद्देश्य अंकों का अंबार लगाना नहीं बल्कि सोच का विस्तार करना है। उन्होंने कहा कि परीक्षा एक उत्सव है, अस्तित्व की जंग नही। उत्तर पुस्तिकांए बच्चों का भविष्य विल्कुल भी तय नहीं करतीं हैं, परीक्षाएं केवल वर्तमान तैयारी को दर्शाती हैं। अध्यन के बाद दस मिनट का ब्रेन बैंक ले और गहरी सांस लेने का अभ्यास अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यह अभ्यास तनाव को काफी हद तक कम करता है। उन्होंने कहा कि अक्सर माता-पिता की अत्यधिक अपेक्षाएं बच्चों में घबराहट पैदा करती है। अभिभावक बच्चों पर अंकों का दबाव बनाने के बजाय घर में शांत एवं सकारात्मक वातावरण बनाए रखें। उन्होंने कहा कि लगातार कई घंटों तक न पढ़े, एक दो घंटों की पढ़ाई के बाद 10से15 मिनट का छोटा ब्रेक, मानसिक शांति के लिए सुबह 10 मिनट तक योग एवं 7, 8घंटे की पर्याप्त नीद अनिवार्य है।

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