आधी अधूरी नहर साफ कर निकाल लिया लाखों बजट,जिम्मेदारों पर कब होगी कार्रवाई : स्थानीय किसान

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आधी अधूरी नहर साफ कर निकाल लिया लाखों बजट,जिम्मेदारों पर कब होगी कार्रवाई : स्थानीय किसान

कौशांबी में नहर साफ सफाई के नाम पर भ्रष्टाचार का खेल जोरो पर

लाखों किसानों के खेतों तक नहीं पहुंच रहा नहर का पानी, किसानों की फसल सिंचाई के अभाव से हो रही बर्बाद, किसान के सामने उत्पन्न होती है भुखमरी की स्थिति

ओजस्वी किरण ब्यूरों कौशाम्बी

नेवादा कौशाम्बी : नहरों की साफ सफाई करने के लिए सरकार लाखों करोड़ों का बजट प्रति वर्ष सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दे रही है। लेकिन सिंचाई विभाग के अधिकारी और ठेकेदारों के गठजोड़ के बाद नहर की सफाई तो नहीं होती लेकिन फर्जी टेंडर करके ठेकेदारों को धन आवंटित कर दिया जाता है। और बाद में हिस्सा बंटवारा कर सरकारी रकम से कमीशन ले लिया जाता है जिससे नहरों की दुर्दशा खत्म नहीं हो रही है। जहाँ लाखों किसानों के खेतों तक नहर का पानी नहीं पहुंच रहा है जिससे किसानों की फसल बर्बाद होती जा रही है और उनके सामने भुखमरी जैसे विकट की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। लेकिन बीते कई वर्षों से नहर सफाई के नाम पर करोड़ों की हेरा फेरी के इस खेल में अफसर गंभीर नहीं है। जिससे सिंचाई विभाग का यह भ्रष्टाचार बीते कई वर्षों से बिना रोक-टोक के चल रहा है। जिससे ठेकेदार और विभाग के अफसर मालामाल हो रहे हैं।लेकिन किसानों की शुद्ध लेने वाला कोई जिम्मेदार अफसर सामने अभी तक नहीं आया है।जिले के तमाम नहरों की सफाई इस वर्ष भी सिंचाई विभाग द्वारा नहीं की गई है और सिल्ट सफाई के नाम पर लाखों का बजट ठेकेदारों को दे दिया गया है। जो बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है किशुनपुर कैनाल नहर मे आधी अधूरी सफाई कर लाखों का बजट निकाल लिया गया। स्थानी किसानों का कहना है कि नहर की सिल्ट की सफाई न होने की वजह से नहर में पानी नहीं आता है जिससे भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है।

नेवादा ब्लॉक के फरीदपुर गांव के पास नहर मे पूरी तरह से कूड़ा करकट का ढेर लगा हुआ है नहर मे सरपत का ढेर दिखाई दे रहा है। जबकि विभागीय सूत्रों की माने तो इस नहर की सिल्ट सफाई के नाम पर ठेकेदार को लाखों का भुगतान किया जा चुका है। अब सवाल उठता है कि नहर में सिल्ट सफाई नहीं हुई कूड़ा करकट और घास उगे हुए हैं तो फिर ठेकेदारों को किस बात का विभाग के अफसर ने भुगतान किया है। जो बड़ी जांच का विषय है लेकिन जांच होती भी नहीं दिख रही है और सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अफसर पर भ्रष्टाचार का मुकदमा भी नहीं दर्ज हो रहा है। जिससे किसानों की मुसीबते कम नहीं हो रही है। किसानों के फसलों तक नहर का पानी नहीं पहुंच रहा है नहर का पानी न पहुंचने से किसानों की फसले सूख रही है बर्बाद हो रही है और किसान भुखमरी के कगार पर पहुंच रहा है।नहर सफाई के नाम पर करोड़ों के भुगतान की यदि शासन प्रशासन ने जांच कराई तो सिंचाई विभाग के अफसर का कारनामा बेनकाब होगा और सिंचाई विभाग के कई अफसर जेल के सलाखों के पीछे होंगे।

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