जीविका के साथ धर्म की रक्षा के लिए भी जागरूक हों युवा- पुरी शंकराचार्य

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जीविका के साथ धर्म की रक्षा के लिए भी जागरूक हों युवा- पुरी शंकराचार्य

ओजस्वी किरण ब्यूरों 

प्रयागराज। शंकराचार्य गोवर्धन मठ पुरी ओड़ीसा स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा है कि जीविका जीवकोपार्जन के लिए होती है लेकिन सिर्फ जीविकोपार्जन के लिए ही पूरा जीवन लगा दिया जाए इससे धर्म की रक्षा नहीं होगी। युवाओं को जीविका के साथ अपने धर्म की रक्षा के लिए भी जागरूक होना होगा। यदि हिंदू सिर्फ पेट और परिवार तक सीमित रहेगा तो भविष्य में दुर्दशा को प्राप्त होगा। 

अपने 10 दिवसीय प्रवास के दौरान गुरुवार को गोवर्धन मठ पुरी ओड़ीसा के प्रयागराज केंद्र श्री शिवगंगा आश्रम झूंसी में आयोजित हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी में पुरी शंकराचार्य ने कहा कि अपने घर, मोहल्ले आदि में सनातन धर्म संस्कृति की चर्चा करनी चाहिए ताकि नई पीढ़ी को अपने धर्म के विषय में जानकारी मिल सके। अपने क्षेत्र के मठ मंदिरों को शिक्षा रक्षा का केंद्र बनाने पर विचार करना चाहिए। शंकराचार्य ने कहा कि गंगा का नाम ही तारने वाला है। विडंबना यह है कि आज विकास के नाम पर पूरे पृथ्वी के पर्यावरण का दोहन हो रहा है जो आगे चलकर वायुमंडल को और दूषित करेगा। 

शंकराचार्य ने कहा कि सभी के पूर्वज सनातनी आर्य वैदिक हिंदू हैं इसमें कोई संशय नहीं है। शंकराचार्य ने कहा कि अपने जीवन में प्रतिदिन कम से कम सवा घंटे की उपासना हिंदुओं को करनी चाहिए। एक बार में संभव न हो तो दिन भर में इतना समय तो निकालना ही चाहिए उपासना के लिए। पुरी शंकराचार्य ने कहा कि जो व्यवहार अपने लिए उचित न लगे वो व्यवहार दूसरों के साथ भी नहीं करना चाहिए। जिसके जीवन में हिंसा, दुर्व्यसन, व्यभिचार आदि अवगुण हों वो मनुष्य असुर प्रकृति का होता है। जीवन में सात्विकता लाने के लिए भगवत चिंतन, भगवन् नाम का जप स्मरण करना चाहिए। संगम के दर्शन से ही दिव्यता का अनुभव होता है। 

 अवसर पर शंकराचार्य के निजी सचिव स्वामी श्री निर्विकल्पानंद सरस्वती, प्रफुल्ल चैतन्य ब्रम्हचारी, हृषिकेश ब्रह्मचारी, राजेश चैतन्य ब्रह्मचारी, राम कैलाश पांडेय सहित बड़ी संख्या में शिष्यगण एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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