बाडी बनाने की जल्दबाजी युवाओं की सेहत पर पड़ रही भारी, चिकित्सकीय परामर्श लिए बिना इंजेक्शन दवाओं का कर रहे सेवन : डा. आनंद सिंह

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बाडी बनाने की जल्दबाजी युवाओं की सेहत पर पड़ रही भारी, चिकित्सकीय परामर्श लिए बिना इंजेक्शन दवाओं का कर रहे सेवन : डा. आनंद सिंह

 ओजस्वी किरण ब्यूरो 

प्रयागराज। फिट और मस्कुलर बाड़ी का क्रेज युवाओं में इस कदर बढ़ गया है कि वे सेहत की परवाह किए बिना खतरनाक शार्टकट अपना रहे हैं। जिम में जल्दी नतीजे पाने की चाह में स्टेरायड, इंजेक्शन एवं अनियंत्रित सप्लीमेंट का इस्तेमाल आम हो गया है। इससे किडनी, लीवर, हार्ट एवं मानसिक स्वास्थ पर गंभीर असर पड़ रहा है। महानगर में तेजी से खुल रहे जिम में प्रशिक्षित ट्रेनरों और स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था का अभाव भी एक बड़ी वजह है। संतुलित डाइट, सही वर्कआउट और धैर्य ही फिटनेस का सुरक्षित रास्ता है। मजबूत बाडी से पहले सेहत का बेहतर होना आवश्यक है। जिम जा रहे एक युवा ने बताया कि उन्हें दो महीने में बाड़ी चाहिए थी, उनके ट्रेनर ने इंजेक्शन और सप्लीमेंट सुझाए। शुरूआत में असर दिखा, लेकिन बाद में कमजोरी और घबराहट बढ़ने लगी। डाक्टर की परामर्श के बाद सप्लीमेंट और स्टेरायड छोड़ दिया, काफी समय बाद शरीर सामान्य हुआ। एसआरएन अस्पताल के सहायक आचार्य मेडिसिन विभाग डा. आनंद सिंह ने बताया कि जिम जाने वाले कई युवा बिना किसी चिकित्सकीय परामर्श के ‘एनाबालिक स्टेरायड के इंजेक्शन और टैबलेट का सेवन कर रहे हैं। जिम ट्रेनर्स द्वारा रातों-रात परिणाम देने के लालच में दिए जाने वाले ये सप्लीमेंट्स शरीर के अंदरूनी अंगों को पूरी तरह खोखला कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिखावे एवं इंस्टाग्राम, फेसबुक एवं अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर परफेक्ट वाडी दिखाने का होड़ भी एक प्रमुख कारण है। प्राकृतिक तरीके से बाडी बनाने में समय लगता है जिसके कारण युवा धैर्य खो रहे हैं और शार्टकट अपना रहे हैं।

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