डॉ.अंशुल सिंह ने मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष का कार्यभार ग्रहण किया
ओजस्वी किरण ब्यूरों
प्रयागराज। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज के पैथोलॉजी विभाग में आज एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव हुआ, जब डॉ. अंशुल सिंह ने विभाग के 13वें विभागाध्यक्ष के रूप में विधिवत कार्यभार ग्रहण किया।
मिर्जापुर की मूल निवासी डॉ. अंशुल सिंह ने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ से एमबीबीएस की उपाधि प्राप्त की। इसके उपरांत उन्होंने सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज, आगरा से पैथोलॉजी विषय में एमडी किया। उच्च चिकित्सा शिक्षा पूर्ण करने के बाद उन्होंने कुछ समय तक दिल्ली के प्रतिष्ठित सफदरजंग अस्पताल में कार्य किया। वर्ष 2011 में उन्होंने मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में लेक्चरर के रूप में अपनी सेवाएं प्रारंभ कीं।
कॉलेज में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान डॉ. अंशुल सिंह विभागीय कार्यों में लगातार सक्रिय रहीं। उन्होंने पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. वत्सला मिश्रा एवं डॉ. कचनार वर्मा के साथ मिलकर सेंट्रल पैथोलॉजी, साइटोकेयर तथा विभाग के अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में बढ़-चढ़कर सहयोग किया। इसके साथ ही उन्होंने पोस्टग्रेजुएट, अंडरग्रेजुएट एवं लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी के विद्यार्थियों को नियमित रूप से अध्यापन भी किया। उनके मार्गदर्शन में पढ़े अनेक छात्र आज देश-विदेश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं।
डॉ. अंशुल सिंह के पति डॉ. एके चौधरी एक प्रसिद्ध अस्थि रोग विशेषज्ञ हैं। इस चिकित्सक दंपति का एकलौता पुत्र वर्तमान में विद्यालय में अध्ययनरत है।
वहीं, निवर्तमान विभागाध्यक्ष डॉ. कचनार वर्मा का पिछले दो वर्षों का कार्यकाल ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा रहा। उन्होंने कॉलेज प्रशासन, प्राचार्य कार्यालय तथा मीडिया के साथ उत्कृष्ट समन्वय स्थापित करते हुए विभाग की कार्यप्रणाली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। रिपोर्टों की त्वरित उपलब्धता, मरीजों की सुविधा का ध्यान तथा विभागीय व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए उनके योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा।
कार्यभार ग्रहण करने के अवसर पर डॉ. अंशुल सिंह ने कहा कि डॉ. कचनार वर्मा जैसी कुशल विभागाध्यक्ष का उत्तराधिकारी होना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि डॉ. कचनार वर्मा तथा पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. वत्सला मिश्रा के मार्गदर्शन से मिली प्रेरणा के आधार पर वे अपने सभी सहयोगियों को साथ लेकर विभाग में चल रहे कार्यों को और अधिक गति देंगी तथा पठन-पाठन, शोध एवं चिकित्सकीय सेवाओं को नई दिशा देने का प्रयास करेंगी।

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