यूजीसी बिल के खिलाफ इविवि में छात्रों ने किया प्रदर्शन केंद्र सरकार के विरुद्ध नारेबाजी, बिल को बताया काला कानून
इलाक्षी शुक्ला | उप संपादक
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए बिल के विरोध में छात्रों ने प्रदर्शन किया। बुधवार को बड़ी संख्या में छात्र छात्रसंघ भवन के बाहर एकत्र हुए और केंद्र सरकार तथा यूजीसी के खिलाफ नारेबाजी की। छात्रों ने इस बिल को शिक्षा विरोधी बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की।
सुबह से ही कैंपस का माहौल गरम था। छात्र नेता और विभिन्न संगठनों से जुड़े छात्र हाथों में तख्तियां और पोस्टर लेकर छात्रसंघ भवन के बाहर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी बिल को ‘विभाजनकारी’ बताया और आरोप लगाया कि इसके जरिए उच्च शिक्षा व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की साजिश की जा रही है।
छात्रों का कहना है कि यह बिल विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर सीधा हमला है। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों को बांटने की राजनीति कर रही है। उनका दावा है कि इस बिल से गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा और महंगी हो जाएगी, साथ ही शैक्षणिक संस्थानों की स्वतंत्रता खत्म होगी और शिक्षा का व्यावसायीकरण बढ़ेगा। छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक यूजीसी बिल वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है। अगर सरकार ने हमारी मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन और उग्र होगा। छात्रों ने इसे ‘काला कानून’ करार देते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाया।
छात्रों के सख्त रुख को देखते हुए विश्वविद्यालय परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। मौके पर पुलिस बल तैनात रहा ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। हालांकि, प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा।

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