महाशिवरात्रि स्नान पर्व के साथ ही माघ मेला का समापन
अंतिम स्नान पर्व महाशिवरात्रि पर 40 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य की डुबकी
दिव्य ,भव्य ,सुगम और सुरक्षित माघ मेले का प्रशासन का संकल्प पूरा
ओजस्वी किरण ब्यूरों
प्रयागराज। प्रयागराज के पावन संगम तट में लगे आस्था के सबसे बड़े वार्षिक जन समागम माघ मेले के आखिरी स्नान पर्व महाशिवरात्रि सकुशल संपन्न हो गया। महाशिवरात्रि स्नान पर्व पर भी लाखों की तादाद में श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी में पुण्य की डुबकी लगाई है । प्रदेश की योगी सरकार की तरफ से इस बार के माघ मेले के आयोजन को लेकर किए गए कई प्रयोग भी सफल साबित हुए हैं।
त्रिवेणी के तट पर लगे माघ मेले के आखिरी स्नान पर्व महाशिवरात्रि पर 40 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में पुण्य की डुबकी लगाई है । माघ मेला अधिकारी ऋषिराज बताते हैं कि सुबह से ही संगम में महा शिवरात्रि पर श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी रहा। आज संगम में 40 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी में पुण्य की डुबकी लगाई है। उनका कहना है कि आज के स्नान पर्व में मुख्य रूप से स्थानीय लोगों की अधिकता की वजह से श्रद्धालुओं की संख्या अनुमान से अधिक हो गई।
संगम के निकट के शिव मंदिरों में भी भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन की रणनीति अपनाई थी।
माघ मेले में दर्ज हुआ सर्वाधिक श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड, 2013 अर्ध कुंभ का टूटा रिकॉर्ड
महाकुंभ 2025 के बाद का यह पहला माघ मेला था जिसमें आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर प्रशासन के लिए अनुमान कर पाना बड़ी चुनौती थी। प्रदेश सरकार ने भी इसी को विचार में रखते हुए माघ मेला 2026 में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के माघ मेला में आगमन का अनुमान किया था। लेकिन सनातन की ऐसी बयार चली कि सरकार और माघ मेला प्रशासन की सभी अनुमान पीछे छूट गए।
मेला अधिकारी ऋषिराज का कहना है कि 44 दिनों तक चले इस बार के माघ मेले में लगभग 22 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई है। श्रद्धालुओं की यह संख्या अब तक के सभी माघ मेलों की सर्वाधिक संख्या है।
पौष पूर्णिमा: 31 लाख
मकर संक्रांति: 188 लाख
मौनी अमावस्या : 452 लाख
बसंत पंचमी: 356 लाख
अचला सप्तमी: 200 लाख
माघी पूर्णिमा: 201
महा शिवरात्रि…40 लाख
माघ मेले में इस बार कई नव्य प्रयोग किए गए हैं जिनके प्रभाव और उपयोगिता का आकलन किया जा रहा है। ये नव्य प्रयोग आगामी धार्मिक आयोजनों के लिए आधार साबित हो सकते हैं।

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