स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट चीफ जस्टिस को लेटर पिटिशन सीबीआई जांच की मांग, अफसरों पर हो कार्रवाई
इलाक्षी शुक्ला | उप संपादक
प्रयागराज। माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बटुक शिष्यों के साथ हुई कथित मारपीट का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता गौरव द्विवेदी ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को लेटर पिटिशन भेजकर पूरे मामले की सीबीआई से जांच का निर्देश देने की मांग की है।
लेटर पिटीशन में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई पुलिसिया बदसलूकी, धार्मिक अनुष्ठान में बाधा और नाबालिग बटुकों को हिरासत में लेकर मारपीट के आरोप लगाए गए हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि शंकराचार्य की पालकी को पुलिस द्वारा जबरन रोका गया, बटुक शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। संगम के तट पर पवित्र माघ मेले में धार्मिक परंपराओं का अपमान हुआ, बटुक ब्राह्मणों को अवैध तरीके से हिरासत में लेकर मारपीट की गई। जो कि किशोर न्याय अधिनियम 2015 का सीधे तौर पर उल्लंघन है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजी गई लेटर पिटीशन में यह भी कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 25 का खुलेआम उल्लंघन किया गया है। ऐसे में पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए, दोषी पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने के साथ उनके निलंबन की भी मांग की गई है।
इसके साथ ही धार्मिक स्वतंत्रता और बाल संरक्षण अधिकारों की न्यायिक सुरक्षा की भी मांग लेटर पिटिशन में की गई है। याची की तरफ से भेजे गए लेटर पिटीशन में कहा गया है कि इन सब घटनाओं से व्यथित होकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पवित्र माघ मेले में स्नान त्यागना पड़ा, जिससे तमाम सनातन धर्मावलंबियों की भावनाएं आहत हुई हैं।

+ There are no comments
Add yours