यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सड़क पर उतरे छात्र| नए प्रावधानों से जातीय भेदभाव घटेगा नहीं बल्कि बढ़ेगा

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यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सड़क पर उतरे छात्र| नए प्रावधानों से जातीय भेदभाव घटेगा नहीं बल्कि बढ़ेगा

इलाक्षी शुक्ला | उप संपादक

प्रयागराज। बुधवार को यूजीसी के नए नियमों के विरोध में छात्रों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय समेत शहर के कई इलाकों में छात्रों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया और पदयात्रा निकालते हुए नियमों को जनरल कैटेगरी के खिलाफ बताया। छात्रों का कहना है कि ये नियम जातीय भेदभाव को खत्म करने के बजाय उसे और बढ़ाएंगे।
यूजीसी के नए नियमों के विरोध में इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर के साथ-साथ शहर के अन्य हिस्सों में भी छात्रों ने प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतरे और हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की। छात्रों ने आरोप लगाया कि नए नियमों के जरिए एक वर्ग विशेष को पहले से ही संदिग्ध मान लिया गया है।
बालसन चौराहे पर अर्पित राय के नेतृत्व में छात्रों ने एकत्र होकर यूनिवर्सिटी चौराहे तक पदयात्रा निकाली। इस दौरान यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। छात्रों ने कहा कि यह नियम समाज को जोड़ने वाला नहीं, बल्कि बांटने वाला है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि नए नियम जातीय भेदभाव को समाप्त करने के बजाय सामान्य वर्ग के छात्रों को भेदभाव का शिकार बना सकते हैं। उनका आरोप है कि इन प्रावधानों के जरिए सवर्ण छात्रों को ‘स्वाभाविक अपराधी’ की तरह देखा जा रहा है, जो न्यायसंगत नहीं है।
छात्र नेता अर्पित राय ने कहा कि यूजीसी के ये नियम निष्पक्षता लाने के नाम पर एक वर्ग के खिलाफ माहौल बना रहे हैं। वहीं, अंकित तिवारी ने सवाल उठाया कि अगर सवर्णों के साथ इसी तरह अत्याचार बढ़ता रहा तो वे कहां जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह कौन सा न्याय है, जहां समाज के एक वर्ग को पहले से ही अपराधी मान लिया जाए।
अन्य प्रदर्शनकारी छात्रों ओम मिश्रा, अमन मिश्रा, कार्तिक राय, आकाश शुक्ला, प्रशांत सिंह, विनायक उपाध्याय ने कहा कि नए नियमों से समाज को एक करने के बजाय बांटने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना था कि शिक्षा संस्थानों में समानता जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर किसी एक वर्ग को निशाना बनाना गलत है।

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