जिलाधिकारी की कार के आगे लेट गईं महिलाएं चकमार्ग विवाद पर ग्रामीणों का प्रदर्शन, पुलिस पर महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की

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जिलाधिकारी की कार के आगे लेट गईं महिलाएं चकमार्ग विवाद पर ग्रामीणों का प्रदर्शन, पुलिस पर महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की

ओजस्वी किरण ब्यूरों

प्रयागराज। मेजा तहसील में शनिवार को आयोजित समाधान दिवस के दौरान ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा और एसीपी विवेक चन्द्र यादव को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि अपनी फरियाद अनसुनी देख दर्जनों महिलाएं जिलाधिकारी की गाड़ी के सामने लेटकर रोने लग गई।

यह मामला ग्राम रामनगर के शिववंशराय का पूरा से संबंधित है। ग्रामीण चक मार्ग संख्या 1820 पर दबंगों द्वारा किए गए अवैध कब्जे को लेकर पिछले कई सालों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। इस अवैध कब्जे के कारण गांव के लगभग 400 लोगों का आवागमन बाधित हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि तहसीलदार न्यायालय ने 15 अप्रैल 2025 को ही बेदखली का आदेश जारी कर दिया था, लेकिन प्रशासन इसे लागू कराने में विफल रहा है। उन्होंने राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों पर विपक्षी से सांठगांठ कर मामले को जानबूझकर लटकाने का आरोप भी लगाया। ग्रामीणों ने शिकायत में लिखा तहसील के जांच अधिकारी और राजस्व विभाग ने विपक्षियों के साथ मिलकर झूठी रिपोर्ट लगाई है।

जिलाधिकारी की गाड़ी रोके जाने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और महिला पुलिसकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद डीएम के कार के सामने सड़क पर लेटी महिलाओं को हटाया। इस कार्रवाई से ग्रामीण और भड़क गए और तहसील गेट पर ‘पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद’ तथा ‘भ्रष्ट अफसरशाही नहीं चलेगी’ के नारे लगाने लगे। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने मेजा डीसीपी संत प्रसाद उपाध्याय पर उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट का आरोप लगाया। प्रदर्शन की उग्रता देख एसीपी विवेक चन्द्र यादव ने मौके पर मौजूद मातहतों और राजस्व कर्मियों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने पूछा कि जब आदेश हो चुका है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने भी मामले की फाइल तलब करते हुए स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के साथ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।

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