परीक्षा के तनाव से कैसे बचें: विशेषज्ञ डॉ.वी.के.कटियार की सलाह

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परीक्षा के तनाव से कैसे बचें : विशेषज्ञ डॉ. वी.के. कटियार की सलाह

डॉ इलाक्षी शुक्ला उप-संपादक 

परीक्षा का समय आते ही विद्यार्थियों में तनाव, चिंता और दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। खासकर बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान कई छात्र अनिद्रा, घबराहट और एकाग्रता की कमी से जूझने लगते हैं। ऐसे में प्रयागराज के प्रसिद्ध न्यूरो साइकियाट्रिस्ट डॉ. वी.के. कटियार ने अभिभावकों और छात्रों को परीक्षा तनाव से बचने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।

डॉ. कटियार आश्रय क्लिनिक फॉर न्यूरो, ब्रेन एंड माइंड केयर में प्रैक्टिस करते हैं और न्यूरोलॉजी व साइकियाट्री के विशेषज्ञ हैं। उनके अनुसार बोर्ड जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं के समय बच्चों पर माता-पिता का अत्यधिक दबाव, तुलना की प्रवृत्ति और समय पर योजना न बनाना तनाव का प्रमुख कारण बनता है।

🧠 परीक्षा तनाव के मुख्य कारण

डॉ. कटियार बताते हैं कि अधिक अपेक्षाएं, असफलता का डर, नींद की कमी और अव्यवस्थित पढ़ाई बच्चों को मानसिक रूप से कमजोर बना देती है। इससे उनका आत्मविश्वास घटता है और परीक्षा प्रदर्शन प्रभावित होता है।

बचाव के व्यावहारिक उपाय

विशेषज्ञ के अनुसार परीक्षा तनाव से बचने के लिए निम्न उपाय अपनाने चाहिए—

संगठित अध्ययन योजना बनाएं: विषयों को छोटे भागों में बांटकर पढ़ें, नियमित रिवीजन करें और मॉक टेस्ट दें।

ध्यान और प्राणायाम करें: रोजाना 10–15 मिनट गहरी सांस और मेडिटेशन से मन शांत रहता है।

स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं : संतुलित भोजन लें, 7–8 घंटे की नींद पूरी करें और हल्का व्यायाम करें।

भावनात्मक सहयोग दें : बच्चों को डांटने की बजाय प्रोत्साहित करें, उनसे खुलकर संवाद करें और तुलना से बचें।

अभिभावकों की अहम भूमिका

डॉ. कटियार का कहना है कि माता-पिता को बच्चों की क्षमता और गति को समझना चाहिए। हर बच्चे की सीखने की शैली अलग होती है। सकारात्मक माहौल, विश्वास और सहयोग से ही बच्चा बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।

यदि बच्चे में लगातार घबराहट, चिड़चिड़ापन, नींद की समस्या या पढ़ाई में अरुचि दिखाई दे, तो समय रहते विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है।

लंबे समय के लाभ

डॉ. कटियार के अनुसार ये उपाय केवल परीक्षा में सफलता ही नहीं दिलाते, बल्कि बच्चों को जीवनभर तनाव प्रबंधन, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन बनाए रखने की कला भी सिखाते हैं। नियमित अभ्यास से मानसिक स्वास्थ्य मजबूत होता है और भविष्य की चुनौतियों से निपटने की क्षमता विकसित होती है।

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